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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/६८

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8 ( ४३ ) अपने बारे बहुत कह सके, पर बतियाती कभी नहीं, वटी न धनको होने परभी, सादा रखती जो व्यवहार अवसर मिलने परभी जिसको, विषयभोगका नहीं विचार । क्रुद्ध किये जाने पर आवे बदले का जब अवसर पास, भूल हानियाँ अपनी जाती, खीझ न करती कभीप्रकाश । बुद्धिमती जो रहे निरंतर करती ऐसी चूक नहीं- पूरी के बदले जो देदे मोटी रोटी रूक्ष कहीं । किसी बात को विचार सकती, भेद खोलती पर न कहीं। विवाह-प्रार्थी पीछे आते देख झांकती उधर नहीं । वह ऐसी ही जनी एक हो, यदि ऐसी हो जनी कहीं । देशदामिनी- वह क्या काम आती है ? यागो-मूढ़ों को दूध पिलाती है, घरके खर्चका हिसाव किताब रखती है। देशदामिनी-क्या हो असंगत और थोथा परिणाम है ? यमि- लिया ! यद्यपि यह तेरा पति हैं, परन्तु इसकी बातों में न माना कहो केसियो तुम्हारी क्या अनुमति है ? क्या यह एक बड़ा अश्लील और कम्पट बकवादी मनुष्य नहीं है ? केसियो - श्रीमती ! उसके शब्द मर्म स्पर्श हैं, आपको उसकी तर्कविद्या की अपेक्षा उसकी युद्धं कुशलता अधिकतर रुचिकर होगी। यागो - ( बाप ही आप ) वह देशदामिनी की हथेली पकड़ता है, अच्छा पकड़ ले, वह उसके कान में कुछ कहता है अच्छा ऐसा भी करले | इस छोटे से ही मकड़ी के जाले में मैं एक ऐसी बड़ी के सियो जैसी मक्खी को फँसाऊँगा । हाँ, फिर उसको मुँह की ओर देखकर सुस्कुराता रहूँ । मैं तेरे इस शिष्टाचाररूपी पाश में तुझको फॉरूंगा । ( प्रकट) हां तुम सच कहते हो । वास्तव में ऐसी ही बात है ।