( ४६ ) योग्य पुरुष आदरणीय है। अच्छा देशदामिनी चलो, तुम साइप्रस में बहुतही अच्छी मिली हो । ( ओथेलो, देशदामिनी और अनुचरवर्ग जाते हैं । यागो - ( रौदरिगो से ) तू मुझे थोड़ी देर में पोताश्रय पर मिलना । यहाँ आा, यदि तू साहसी बन सकता है, जैसा कि लोग कहते हैं कि जब कोई नीचजन भी प्रेम में ग्रासक्त होते हैं तब उन के स्वभाव में, जो प्रकृति से उन्हें मिला है, कुछ महत्त्व प्राजाता है: तो मेरी बात सुन | आज रातको सहकारी सेनापति की नौकरी कोतलगारद में है। हाँ, मैं तुम्से पहिले एक बात कहे देता हूँ कि देशदामिनी उसपर लट्टू बन रही है ।
वैदरिगो- उसपर ! ऐसा संभव नहीं होलकता । यागो - अपना मुँह बंदकर ( रौदरिगो की अंगुली उसके मुँह पर लेजाता है ) पहले अपने से बड़े बुद्धिमान् की बात सुनते । इस बातको देख कि मूर के केवल डींग मारने और मिथ्या कल्पित बातें कहने ही से वह किस ढिठाई से उसके प्रेमजाल में फंसी है । यद्यपि उसने अपने गत जीवन काल की गर्वित और मुर्खता भरी मिथ्या बातें वर्णन करके उसका प्रेम विजय किया है, तौभी तृ मूर्खता से इस बात की भावना कदापि मत रख कि वह केवल वकवाद से ही उसका प्रेमभाजन बना रहेगा । उसकी आँखों को तृप्ति होती चाहिये, और उसको उस भुतने को देखने से क्या आनन्द मिल • सकता है ? जब कि विषयासक्ति से सहवास की इच्छा कुंठित हो- जाती है, तो उसको फिर जागृत करने के लिये, तृप्ति के अनंतर पुनः नूतन दुधा पैदा करने के लिये रंग रूप में मनोहरता, उमर में ree सहन र सौन्दर्य में समानता होनी चाहिये । मूर इन सब
- कोतलगारद - अव छावनियोंमें प्रचलित शब्द होगया है । कोतलगारद
उस स्थान को कहते हैं जहां सेना कर्मचारी पहरे के लिये इक होते हैं ।