S (88) चिढ़ाना जिससे वह ऐसा कर डाले। बस इतनेही से मैं लाइमल के लोगों में हलचल मचा दूंगा । और उनका क्रोध विना केसियो के पदच्युत हुए शाँत नहीं होगा। इसप्रकार हमारे मार्गमें जो वित्र है टल जावेगा और हमारा बड़ा लाभ होगा। तुम्हारी इच्छायें अल्प समय में ही पूर्ण होजावेगी, क्योंकि उस समय मुझे उनके पटाने का प्रयत्न करनाही शेष रह जायगा । जब तक कि ऐसा नहीं होता, हमारे कृतकार्य होने को कुछ प्राशा नहीं है । रौदरिगो - मैं ऐसा अवसर ढूंढूंगा और यदि हाथ लगगया तो इस कामको सिद्ध करूँगा । यागो - निःसन्देह तुझे ऐसा अवसर मिल जायगा । दुर्ग में आकर मुझे शीघ्र मिलना। मैं ओथेलो का असवाव जहाज से लेनेको जारहा हूँ । प्रणाम | रौदरिगो-दंडवत् । ( ३दिरिणो जाता है ) यागो-केसियो देशदामिनी से स्नेह रखता है, मुझे इसका पूर्ण विश्वास है । वह भी उससे स्नेह रखती है, यह बात संभव है और इसका सुगमता से विश्वास होसकता है। मूरको चाहे मैं देख नहीं सकता, परन्तु वह एक स्थिर, प्रिय और उच्च प्रकृतिका पुरुष है । मेरा निश्चित विचार है कि वह देशदामिनीका परम प्रिय पति होगा । मैं भी देशदामिनी का प्रेमी हूँ । इसका कारण केवल कामेच्छा ही नहीं है ( कदाचित् मैं ऐसे बड़ेपापका भी भागी हूँ), प्रत्युत किसी अंश में इलका कारण मेरी बदला लेने की प्रबल इच्छा भी है, क्योंकि मुझे सन्देह है कि कामी सूर मेरी शयन-शय्या पर कूद पड़ा है । इसकी चिंता एक रसादि विष के समान मेरे हृदयको काटती रहती. है और मेरी आत्मा तब तक किसी प्रकार शाँत नहीं होसकती हैं और न होगी जब तक कि मैं या तो खीका बदला स्त्रीसेन चुकाएँ
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