(*1) यागो-भरे भाई-बे तो हमारे मित्र हैं बस एक प्यासी शो पोनी ही होगी, अच्छा तुम्हारे बदले में पीलूँगा । केखियो- मैंने आजरात एकही प्याली पी है और उसमें अपनी जानमें चतुराई से पानी भी मिला लिया था पर देखो तो उससे ही मेरा रंग ढंग कैसा बदल गया है । दुर्भाग्यवश मुझ में यह बडी त्रुटि है और अब मुझमें और पीनेकी सामर्थ्य नहीं है। यागो-अरे भलेमानस तुझको क्या होगया है ? यह रात तो पानगोष्टियों की है उन वीरों की ऐसी ही इच्छा है। केसियो-वे कहाँ हैं ? यागो - वे यहां दरवाज़े पर खड़े हैं, मैं विनती करता हूं कि उनको भीतर बुला लीजिये ! के सियो— मैं उनको बुलाता हूँगा पर यह बात मुझे अच्छी नहीं लगती । ( जाता है । ) यागो-यदि मैं उसको एक प्याता और पिला सकूं तो, बसते: आज रात एक प्याला पी ही रक्खा है इस एक और प्याले से वह एक नौजवान प्रेम के पालतू कुत्ते के समान झगड़ा करने और चिढ़ने लगेगा। तथा इस समय मेरे कामरोगी अनगढ़ रौदरिगोकी क्या दशा होरही है? वह देशदामिनी की लगन में विक्षितला हो रहा है, और उसकी स्मारोग्यता के लिये बोतल पर बोतल गटका चुका है। वह पहरा देरहा है। मैंने साइप्रस के तीन लौंडों को ओ बडे घराने के और बड़े तीव्र स्वभाव के है जो ज़रा से अपमान पर मारने मरने को उतारू होजाते हैं और जो इस लड़ाकू टापू के मानो तत्त्वसार हैं, प्याले पर प्याले चढवा कर खूब गरम कर रक्खा है । और भी पहरा दे रहे हैं। अन इन पियक्कड़ों की चौकड़ी में मैं केसियो
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