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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/८२

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( ६७ ) कि वह किसी न किसी दिन जब वह वादीकी, सरण मे आवेगा, तो कोई ऐसा अनर्थ कर बैठेगा कि जिसमें इसद्वीपमें हलचल मच जायगी मौनतेनो-पर क्या वह बहुधा ऐसाही रहा करता है ? यागो उसके सोनेके पहिले सदैव ऐसी ही प्रस्तावना होती है । यदि मदिरारूपी पालने में भूलने से वह निद्रावश न होजाया करे तो वह घड़ी के दो चक्कर लगाने तक पहरा देसकता है । मौनतेनो-यदि सेनाधिपति महाशय इस बात से सचेत कर दिये जाते तो अच्छा होता। कदाचित् उनको इसकी खबर नहीं है, या उनका ऐसा अच्छा स्वभाव है कि वे केसियो के दृश्यमान गुणों' की प्रतिष्ठा करते हैं और उसके दूषणों की ओर झाँकते भी नहीं । क्या यह बात सच्ची नहीं है ? दरिगो का प्रवेश ) यागो -- ( अलग होकर ) कहो रौदरिगो क्या बात है ? मैं तुमसे प्रार्थना करता हूँ कि तुम सहकारीका पीछा मत छोड़ो- जाओ । ( रौदरिगो जाता है। ) मौनतेनो- यह बड़ा शोचनीय विषय है कि मूर महोदय ने अपना सहकारी पद ऐसे पुरुष के भरोसे छोड़ रक्खा है, जिसकी मदिरापानकी ऐसी बुरी वान है, उनको यह बात जतादेनी बहुत ठीक होगी । यागो यदि कोई इस सारे साइप्रस द्वीपकी सम्पत्ति भी मुझको देनी करे, तौभी मैं ऐसा काम कदापि नहीं करूँगा। मैं केसियो को बड़ा प्यारा मानता हूँ और मैं भरशक्य उसकी इस बुरी लतको छुड़ाने का प्रयत्न करूँगा, पर सुनो तो यह कैसा गुल गपाड़ा होरहा है ? (नेपथ्य में बचाओ बचाओ की चिल्लाहट । ) ( रौदरिगों को खदेड़ते हुए केसियो का पुनः प्रवेश 1 ) केसियो- अरे दुष्ट ! सरे मीच ! -