नीशा (६५) में फैले प्रागये ? केलियो । पानासक्तिरूपी पिशाचिनीकी ऐसी इच्छा हुई है कि कोषरूपी पिशाच को अपना स्थानापन्न करदूँ, इससे मेरा एक टू- पण क्रोध, दूसरे दूषण पानासक्ति से मुझे इलभाँति प्रभित्र कर रहा है कि मैं अपने आप से पूर्ण घृणा करने लगाया हूं | यागो । अहो ! अब तो तुम बड़े कड़े नीतिशास्त्रकार बनगये हो । काल, देश और इस भूमि की वर्तमान अवस्था का विचार करके मैं भी अन्तःकरण से यही चाहता हूं कि ऐसी दुर्घटना न होती परन्तु जत्र दोवड़ी है तो मानी भलाई के जिये उसके सुधार का प्रयत्न करना चाहिये । केसियो । यदि मैं उनसे फिर पदारूढ़ करने की प्रार्थना करूंसो निश्चय वे मुझसे यह कहेंगे कि तुम पियक्कड़ हो । उस उतरले यदि मेरे शेषनाग के ले सहस्र मुँह भी हों तो वेभी बंद हो जायेंगे । मदि- राके पीने से विचारशील मनुष्य भी उसी क्षया मूर्ख और फिर पशुवत् होजाता है, यह कैला आश्चर्य है । मदिरा का प्याला और बसका अंग पिशाचतुल्य होता है। यागो। बहुत बातें न बनायो । उसका खुरीति से सेवन करना चाहिये, अच्छी सुरा भली स्तिभ्य प्रिय वस्तु होती है । उसको अधिक free are aपना गजामत फाड़ो और सुजन सहकारीजी मैं समझता हूँ कि तुमको इसबात का ध्यान है कि में तुमले प्रेम राता हूँ । केलियो । हां महाशय, मैनें अपने मतवाला होने के विचार की अच्छी परीक्षा करली है ।
- मूल में हिद्राहे । वह एक सर्प था जिसके नो मुख थे । वह टेफन और इि
दना से पैदा हुआ था और वीर हरक्युलीज़ ने उसका वध कियाथा ।