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कलम, सलवार और त्याग
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पर सबसे महान् कार्य जो टोडरमल की यादगार है और जिसने सारे सभ्य-जगत् में अर्थनीतिज्ञों में उसको विशिष्ट स्थान दे रखा है, उसका मालगुजारी को बन्दोबस्त है जिसको संक्षेप में बता देना विस्तार- भय होते हुए भी, हम आवश्यक समझते है।

पहले मालगुजारी का प्रबन्ध कूते पर था। टोडरमल की सलाह से सारी अधिकृत भूमि की पैमाइश की गई। पहले जरीब रस्सी की होती थी, इससे सूखी और तर जमीन में अन्तर पड़ जाता था। इसलिए बॉस के टोटों में लोहे की कड़ियाँ डालकर जब तैयार की गई। सारी सुखी और गीली जमीन सय पहाड़ जङ्गल, ऊसर, बंजर के नाप खाली गई। कुछ गाँवों का परगना, कुछ परगनो की सरकार, और कुछ सरकारों का एक सूबा ठगा गया। बन्दोबस्त दस साली नियत हुआ। अब ३० साला नियत है। राजस्व का नियम यह बाँधा कि घारानी अर्थात् ऐसी जमीन में जहाँ वर्षा के जल से अन्न उत्पन्न होता हो, आधा किसान का और आधा बादशाह का और सिंचाईवाली जमीन में हर खेत पर चौथाई खर्च और उसकी खरीद बेची की लागत लगाकर अनाज में एक तिहाई बादशाही। ईंख इत्यादि पर जो आला जिन्स कहलाती है, और पानी, निगरानी, कमाई आदि की मेनहत अनाज से ज्यादा खाती हैं, प्रकार के अनुसार १/४, १/५, १/६ या १/७ हक्क बादशाही, बाकी हक़ काश्तकार। “आईने अकबरी' में इनके नियम जिन्सवार लिखे है।

युरोपीय महापुरुषों की तरह टोडरमल ने भी हर काम को निश्चित सिद्धान्त और समय के अनुसार करने की आदत डाल रखी थी। समस्त विभागों के दफ्तर कठपुतली की तरह उसकी उँगली के इशारे पर काम करते थे। अकबर जैसा गुणों की परख करनेवाली बादशाह इन गुणों की क़द्र न करता, यह असंभव था। इसमें सन्देह नहीं कि उसके नियम-प्रतिबन्धों के कारण बड़े और प्रभावशाली लोग अकसर दिल में जला करते थे। इसी से अकबर के काल के. इतिहास-