पृष्ठ:कलम, तलवार और त्याग.pdf/१०६

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श्री गोपाल कृष्ण गोखले
 


क़ालिजों का सिरमौर है। दादा भाई नौरोजी, सर फ़ीरोज़ शाह मेहता जैसे राष्ट्रनायकों की शिक्षाशाला होने का गौरव इसी कालेज को प्राप्त है। मिस्टर गोखले की नैसर्गिक प्रतिभा की यहाँ बहुत जल्दी धुम मच गई । विद्यार्थी और अध्यापक सभी आदर की दृष्टि से देखने लगे। गणित से आपको विशेष रुचि थी और कालेज के गणिताध्या- एक मिस्टर हथियार्न अपने होनहार शिष्य के बुद्धि-वैभव पर गर्व किया करते थे। चूँकि आपके मा-बाप पढ़ाई का रत्नच न उठा सकते थे, इसलिए यह अत्यावश्यक था कि परीक्षाफल ऐसा हो जिससे आप छात्र-वृत्ति के अधिकारी ठहराये जायँ, और कोई भी आदमी जो आप और आपके गुणों से परिचित था, आपकी सफलता में रत्ती बराबर भी संदेह न कर सकता था। पर कुछ ऐसे संयोग उपस्थित हुए कि आप सम्मान के साथ बी० ए० की उपाधि नाव प्राप्त कर सके। इस बिफलन से आपको जो दुःख हुआ उसका अंदाजा वही अच्छी तरह कर सकता है जिसकी आशाओं पर इस प्रकार पानी फिर गया हो। अन्त में जीविका की चिन्ता आपको पूने ले गई। यहाँ इंजीनियरिंग कालेज में भरती होने का विचार था जिसके लिए गणित में प्रवीण होने से आप विशेष रूप से उपयुक्त थे। पर सफलता फिर अपना अमंगल-रूप लेकर सामने आई। ५ वेश की परीक्षा समाप्त हो चुकी थी और प्रिंसपल ने आपको भरती करने में असमर्थता प्रकट की। इस नई विफलता से आपको मन और भी छोटा हो गया। फल मनचाहा होता तो आप किसी डिवीजन के इंजीनियर हो जाते और धनवैभव के विचार से आपकी स्थितिं कहीं अच्छी होती। मगर फिर आपके हृदय मस्तिष्क के उच्च गुणों की अभिव्यक्ति जाने किस क्षेत्र में होती। सच तो यह हैं कि आपके भाग्य में देश और जाति पर निछावर होना लिखा था। आबकी वह विफलताएँ जो आपकी निजी आकांक्षाओं की पूर्ति में बाधक हुई, राष्ट्र के लिए ईश्वर की बहुत बड़ी देन सिद्ध हुई। भगवान करे, ऐसी विफलताएँ जिनके शुभ परिणामों पर सहस्रौं सफलतए ईर्ष्या करें, सबको प्राप्त हौं।