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'कलम, तलवार और त्याग
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शौर्य और साहस रखनेवाले और भी लोग दुनिया में हो गये हैं, पर जिस दुर्लभ गुण ने इटालियन जाति को सदा के लिए उसका ऋणी, बना दिया है वह है उसकी बेदाग नेकनीयती और निर्मल, निष्काम देशभक्ति।

गेरेबाल्डी का जन्म २२ जुलाई, १८७० ई० में नाइस नामक नगर में हुआ। उसका बाप एक छोटे दरजे का नाविक था, जो दिनों के फेर के कारण गरीबी की हालत में दिन काट रहा था। हाँ, उसकी मा बड़ी साध्वी सुशीला स्त्री थी। गरीबी वह बुरी बला है कि मनुष्य के बहुत-से गुणों पर परदा डाल देती है। पर इस अर्थ-कष्ट में भी यह महिला बड़े सन्तोष और शान्ति के साथ अपना निर्वाह करती थी। अच्छी माताओं की कोख से सदा ही सपूत जन्मे हैं। दुनिया के महान् पुरुषों में से अधिकतर ऐसे हैं जिनके हृदयों में उनकी माताओं के गुणों ने ही सद्गुणों, सदुद्देश्यों और ऊँचे आदर्शों के बीज बोये। गेरीबाल्डी भी अपनी मा के सद्गुणों से बहुत प्रभावित हुआ। वह खुद लिखता है-

वह विशुद्ध प्रेम जो मुझे अपने देश के साथ है और जिसने मुझे अपने अभागे देशवासियों के दुख-सुख का साथी बना दिया है, उसका बीज उस समय उगा था जब मैं अपनी गरीब मा को गरीबों के साथ हमदर्दी दिखाते और दुर्दशा-ग्रस्तों पर करुणा करते हुए देखता था। मैं असत् की पूजा करनेवाला अंधविश्वासी नहीं हूँ, पर मैं स्वीकार करता हूँ कि कठिन से कठिन विपत्ति के समय जब समुद्र मेरे जहाज को जलसमाधि देने पर तुला होता और उसे काग़ज़ की तरह उछालता होता था थी जब हवा की सनसनाहट की तरह बंदूकों की गोलियाँ मेरे कान के पास से सनसनाती हुई निकल जाती थीं और मेरे सिर पर गोले ओले की तरह बरसते होते थे, मैं अपनी स्नेहमयी माता को अपने बेटे के लिए भगवान से विनती करते हुए देखता। मेरा वह साहस और वीरता जिस पर बहुतो को अचरज होती है, इस अट्टल विश्वास