पृष्ठ:कवि-प्रिया.djvu/३००

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( २८२ ) उदाहरण कवित्त मदन मोहन | कहौ रूप को रूपक कैसो, मदन बदन ऐसो जाहि जग मोहिये । मदन बदन कैसो शोभा को सदन श्याम, जैसो है कमल ? रुचि लोचननि जोहिये । कैसो है कमल ? शुभ आनन्द को कन्द जैसो, कैसो है सकंद १ चन्द उपमान टोहिये । कैसो है जु चन्द वह ? कहिये कुँवर कान्ह, सुनौ प्राण प्यारी जैसो तेरो मुख सोहिये ॥४४॥ श्री राधा जी ने पूछा कि 'हे मदनमोहन | सुन्दरता का रूपक ( उपमान ) क्या है ? श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया - 'कामदेव का मुख, जिस पर संसार मोहित होता है। उन्होने फिर प्रश्न किया है 'हे श्याम | मदन का मुख कैसा शोभावान् है ? तो श्रीकृष्ण बोले कि 'जैसा कमल है, उसकी शोभा आँखो से देख लो।' तब उन्होने पुन पूछा कि 'कमल कैसा सुन्दर है ? हे शुभ | बतलाइए।' तब वह बोले कि 'जैसा आनन्द पूर्ण बादल ,' उन्होने पुनः प्रश्न किया-'बादल कैसा सुन्दर है । तब उन्होने उत्तर दिया कि 'उसके समान तो खोजने पर चन्द्रमा ही मिलता है। राधा जी फिर बोली कि हे-'कुवर कृष्ण वह चन्द्रमा कैसा सुन्दर है ?' तब उन्होने उत्तर दिया कि हे - 'प्राणप्यारी | सुनो, जैसा तुम्हारा मुख सुन्दर है ।' २१-परस्परोपमा दोहा जहाँ अभेद बखानिये, उपमा अरु उपमान । तासों परस्परोपमा, केशवदास बखान ॥४५॥