पृष्ठ:कोड स्वराज.pdf/१०५

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इस छोटे से यूएसबी में 19,000 भारतीय मानक हैं।

इसके बावजूद, यह केवल एक कॉपीराइट संबंधी नोटिस नहीं है। यह एक नोटिस होता है। कि आप हमारी अनुमति के बिना इन चीजों की प्रतिलिपि नहीं कर सकते हैं; और वे इसे बेचते हैं। भारत में नेशनल बिल्डिंग कोड का मूल्य 14,000 रुपये है। यह एक किताब के लिए बहुत अधिक कीमत है, जिन्हें भारत का हर इंजीनियरिंग छात्र पढ़ना चाहता है। यदि आप इसे किसी दूसरे देश में खरीदते हैं, तो इसकी कीमत लगभग 1.4 लाख रूपये है, जो दस गुना ज्यादा हैं। यदि आप भारत के साथ व्यापार करना चाहते हैं, तो आपके लिए यह जानना जरूरी होगा कि भारत के सुरक्षा संबंधी कानून क्या हैं।

[अनुज श्रीनिवास] सही कहा आपने, यह सच है। 2013 में, आपने कुछ डेटा लिए और इसे सार्वजनिक कर दिया, लेकिन बीआईएस ऐसा करने से खुश नहीं था।

[कार्ल मालामुद] हाँ, बीआईएस का इस बात पर ध्यान नहीं गया। सर्वप्रथम यह हुआ कि मैंने कई भारतीय मानक खरीदे। मैं चोरी छिपे काम नहीं करता हूँ। मैंने श्री सैम पित्रोदा से बात की। वह उस समय सरकार में शामिल थे और मनमोहन सिंह के लिए काम करते थे। मैंने उनसे कहा, “पित्रोदा-जी, मैं आपसे मिलने आया हूं।” मैं गया और उनसे मिला और मैं मानकों की प्रतियाँ ले गया। मैंने स्थिति को विस्तार से बताया और कहा, “मैं इनको इंटरनेट पर डालूंगा, आप इसके बारे में क्या सोचते हैं?” उन्होंने कहा, “हां, यह अच्छा है।” मैंने कहा, “अच्छा, आप यह जानते हैं कि भारतीय मानक ब्यूरो ऐसा करने से नाराज हो सकता है।” उनका कहना था, “यह महत्वपूर्ण जानकारी है। इसे उपलब्ध होना चाहिए।” उन्होंने इसपर ध्यान नहीं दिया। मैंने सभी 19,000 मानक ले लिए और उन्हें इंटरनेट पर डाल दिया। मैंने मानकों के डीवीडी के लिए, एक वर्ष के लिये, 5,000 डॉलर का भुगतान किया। फिर, मेरी सदस्यता का नवीनीकरण कराने का समय आ गया।

[अनुज श्रीनिवास] ज़रूर

[कार्ल मालामुद] मैंने उन्हें एक पत्र भेजा। मैंने कहा, “हां, यह एक खरीद संबंधी ऑर्डर है। मुझे मेरी सदस्यता नवीनीकृत कराकर खुशी होगी। वैसे, यहां सभी मानक हैं, और हमने उनमें से 971 मानक लिए हैं, और हमने उन्हें एच.टी.एम.एल. (HTML) में बदल दिया है। हमने एस.वी.जी. ग्राफिक्स के रूप में डिजाइन को दोबारा तैयार किया है। हमने सूत्रों को मैथ.एम.एल. (MathMIL) के रूप में रिकॉर्ड किया। क्या आप इन सभी सूचनाओं की प्रतियां लेना चाहेंगे?” मुझे एक पत्र मिला, जिसमें मूल रूप से लिखा था, आप यह करना बंद करें,आपको इसे तुरंत रोकना होगा। उन्होंने मेरी सदस्यता को नवीनीकृत करने से इनकार कर दिया। उन्होंने मांग की कि हम ऐसा न करें।

मैंने उन्हें प्रत्युत्तर भेजा और बताया कि मेरी समझ से भारतीय संविधान के अंतर्गत, सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत, यह सार्वजनिक जानकारी है। वे इससे असहमत थे। हमने मंत्रालय को याचिका दायर की, यह हमारा अगला कदम था। बड़ी बेहतरीन याचिका। पित्रोदा ने शपथ पत्र (एफिडेविट) दिया था। इंटरनेट के पिता विन्टन सर्फ ने शपथ पत्र दिया था। वाटर इंजीनियरिंग और परिवहन के बहुत सारे प्रमुख प्रोफेसरों ने शपथ पत्र पर हस्ताक्षर किए। हमारे पास ऐसे कई उदाहरण थे कि वे मानक बेहतर क्यों लग रहे हैं और हमने अपने योगदान से इसकी महत्ता को बढ़ा दिया हैं।

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