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कोड स्वराज
 


यह याचिका मंत्रालय पहुंची। कुछ समय बाद हमें जवाब मिला कि “नहीं, आप ऐसा नहीं कर सकते हैं।” अगला कदम एक जनहित याचिका संबंधी मुकदमा था। इसमें मेरे सहयोगी श्रीनिवास कोडाली, एक प्रतिभाशाली युवा परिवहन इंजीनियर और डॉ. सुशांत सिन्हा, ‘भारतीय कानून’ (इन्डियन कानून) के अद्भुत प्रकाशक, थे। हमने मुकदमा दायर किया। निशीथ देसाई के लॉ फर्म ने निःशुल्क रूप से हमारा प्रतिनिधित्व करने के लिए सहमत हुए। वे किसी भी तरह की फीस चार्ज नहीं कर रहे हैं। सलमान खुर्शीद, पूर्व कानून मंत्री, हमारे वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में हमारा प्रतिनिधित्व करने के लिए सहमत हुए। माननीय उच्च न्यायालय दिल्ली में हमारी याचिका दायर है।


बीआईएस ने हमारे शिकायत का उत्तर दिया है। हमने उसका जवाब दिया। केंद्र सरकार जवाब देने में विफल रही है। हमने 13 नवंबर को फिर से अदालत की मदद ली और उम्मीद है कि मुख्य न्यायाधीश या जज जो अध्यक्षता कर रहे हैं, वह मौखिक तर्क का आदेश देंगे। सरकार अपने हिस्से का वर्णन करेगी और अपना फैसला प्रस्तुत करेगी।


[अनुज श्रीनिवास] ज़रूर। कार्ल, जैसा कि मैं इसे यहां समझता हूं, बीआईएस की प्रतिरक्षा कॉपीराइट पर निर्भर है। एक और पक्ष जिसके बारे में भी बात हो सकती है, वह यह है कि इन मानकों को तैयार करने के लिए मुआवजे देने की आवश्यकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच एक अंतर यह है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में मानक, जो अंततः कानून और विनियमन (रेगुलेशन) बनते हैं, वे निजी निकायों द्वारा तैयार किये जाते हैं। यहां भारत में, बीआईएस एक वैधानिक निकाय है, जो कभी-कभी, मेरे अनुसार ज्यादातर मानक लाता है, जिसे अंत में, कानून की शक्ति मान लिया जाता है। इन मानकों को कंपनियों, कॉलेजों, निजी व्यक्तियों को बेचने से एक सीमा तक राजस्व प्राप्त होते हैं। क्या आप बीआईएस के राजस्व मॉडल का भी विरोध करते हैं? क्या आप मानते हैं कि आज के दौर में इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए और हमें उन खर्चों के बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए जो पहले, उन मानकों को बनाने में हुईं?


[कार्ल मालामुद] आइये पहले भारत के संदर्भ में इस मामले को निपटा लें और फिर बाकी की दुनिया के बारे में चर्चा करेंगे।


[अनुज श्रीनिवास] ज़रूर


[कार्ल मालामुद] भारत में, ये सभी सरकारी दस्तावेज हैं। उनके राजस्व का 4 प्रतिशत से भी कम आय इन मानकों की बिक्री से होता है। यदि भारत में आप उत्पादों को बेचना चाहते हैं, तो उसे प्रमाणित होना चाहिए। क्या आप जानते हैं कि आपको प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए किसे भुगतान करना पड़ता है? भारतीय मानक ब्यूरो को। उसमें काफी पैसा लगता है। केवल इसके लिए नहीं, वे उनके मिशन के लिए महत्वपूर्ण है। यह जन सुरक्षा के लिये है। मानकों तक कम पहुंच से, आप इंजीनियरों को उस तरीके से शिक्षा नहीं दे पाते जिस तरह आप उन्हें दे सकते हैं। आप स्थानीय अधिकारियों को, इन कोड को ठीक तरीके से लागू करवाने से वंचित करवा देते हैं, क्योंकि उन्हें इन मानको को खरीदने के लिए 14,000 रूपये खर्च करने होते हैं। सार्वजनिक सुरक्षा की जानकारी तक, उनकी कम पहुंच, उनके लक्ष्य के

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