पृष्ठ:कोड स्वराज.pdf/१३९

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कोड स्वराज पर नोट

की कोशिश कर रहा था कि इस ‘सरकारी कार्य’ वाले क्लॉज़ की अदालतों ने किस तरह व्याख्या की है। मैं प्रिंटिंग एक्ट 1895 में, इस उपवाक्य के उत्पत्ति का पता लगाने में सफल रहा जब एक सिनेटर ने राष्ट्रपति के कागजातों के एक संकलन पर कॉपिराइट का दावा किया तो इस बात पर विवाद उठ गया। फिर मैंने इस ‘सरकारी’ उपवाक्य के विधायिकी और न्यायिक इतिहास को दिखाया, जो कॉपीराइट अधिनियम 1909 का एक हिस्सा बन गया था जिसे बाद में अदलतों ने, और आगामी कानूनों में इसका इसी तरह का अर्थ लगाया गया है।

मैं बार में गया और मुझे वहां से बाहर निकल जाने के लिए कहा गया।

मैंने इस मामले का समाधान करने के लिए एक रणनीति बनाई। इस रणनीति में अमेरिकी बार एसोसिएशन (एबीए) के हाउस ऑफ डेलीगेट्स के सामने एक प्रस्ताव लाना था। ऐसा करने के लिए, सामान्य रूप से प्रस्तावकर्ता को एक वकील होना चाहिए। मेरे बोर्ड के दो। सदस्य एबीए के सदस्य थे। मेरा यह सोंचना था कि मैं उनके साथ मिलकर एक सह-लेखक की तरह एक पर्चा लिखें जिसमें इस मामले को उठाया जाय और उस आधार पर हम हाउस ऑफ डेलिगेट्स के सामने एक प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकें जिसमें एबीए से हम इस बात की समर्थन की मांग करें कि हम सभी को कॉपीराइट कानन के सभी प्रावधानों का पालन कर चाहिए। यह युक्तिपूर्ण प्रस्ताव लग रहा था।

गैर-वकील के रूप में, मैं वर्ष 2016 में हाउस ऑफ डिलेगेटस में संबोधन देने में सक्षम हो । गया था जिसे “सदन के विशेशाधिकार (special privileges of the floor)” के रूप में जाना जाता है। उस वर्ष मानकों को संघीय कानून में शामिल करने के प्रस्ताव को भी प्रस्तुत किया गया था। एबीए ने एक समाधान, प्रस्ताव के रूप में दिया कि जिससे तकनीकी कानूनों को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जा सकता है लेकिन सिर्फ पढ़ने के लिये। जिसका अर्थ था कि कोई भी व्यक्ति ऐसे कानून को एक उपयोगी फारमेट में, बिना भुगतान किए, प्रयोग नहीं कर सकता है। साथ साथ इस सिस्टम के अधीन, कोई भी व्यक्ति निजी संस्था की अनुमति के बिना किसी भी कानून की बात नहीं कर सकता था। मैंने इस प्रस्ताव का विरोध किया क्यों कि यह पूर्णतः निशुल्क नहीं था, दूसरी तरफ कई मानक निकायों ने भी इसका विरोध किया क्यों कि वे किसी भी तरह के नि:शुल्क उपयोग का विरोध करते हैं। चूंकि, हम दोनों ने इस प्रस्ताव का, दो विपरीत कारणों से विरोध किया तो उस प्रस्ताव का प्रायोजक दल ने ऐसा महसूस किया कि जैसे उन्होंने ज्ञानी (सोलोमोन) के फैसले की तरह बच्चे को दो हिस्से में काटने का न्याय किया है। मेरे कठोर विरोध के बावजूद इस प्रस्ताव को पारित कर दिया, लेकिन कम-से-कम उन्होंने मुझे अपनी बात रखने का मौका तो दिया।

मेरा यह मानना था कि यदि कानूनी प्रकाशन के संरचना के अन्तर्गत आये सभी विषयों पर ठोस चर्चा होती, और उस चर्चा के व्यापक क्षेत्र के अन्तर्गत अध्ययनशील ज्ञान और शिक्षा के विषयों को भी सम्मिलित कर लिया जाता तो ए.बी.ए, इसे संयुक्त राज्य अमेरिका के कॉपीराइट अधिनियम के कानुनी आवश्यकताओं के समर्थन में आवाज़ उठाने के, एक सुअवसर रूप में देख सकती थी।

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