पृष्ठ:कोड स्वराज.pdf/१४१

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कोड स्वराज पर नोट

और उन्हें प्रस्ताव के किसी भी मुद्दे पर, जिन पर उनकी कोई शंका हो, चर्चा करने का प्रस्ताव दिया। लेकिन किसी ने भी मझसे बात नहीं की।

हालांकि किसी ने भी मुझसे बात नहीं की लेकिन यह पता चला कि उस पर बहुत चर्चा हो रही है। एक सप्ताह पहले मैं न्यूयॉर्क में होने वाले बैठक के लिए जाने वाला था, मुझे तत्काल एक पत्र प्राप्त हुआ जिसमें यह लिखा था कि उस प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए फॉन कॉल पर मेरी उपस्थिति आवश्यक थी। मुझ से कहा गया कि कॉल पर अकेले मेरी उपस्थिति प्रयाप्त नहीं है। एक पूर्ण एबीए का सदस्य का, जिसका नाम प्रस्ताव के आधारिक सूची में था, उसे भी कॉल पर मौजूद होना चाहिए क्योंकि मुझे, बेशक वयस्क पर्यवेक्षण (एडल्ट सुपरविज़न) की आवश्यकता है।

हमने फोन किया। एक घंटे तक बात हुई। वह अच्छी नहीं रही। मेरे साथ टिम स्टेनली थे, जो मेरे बोर्ड के संस्थापक सदस्य हैं एवं एबीए के पूर्ण सदस्य हैं, और येल लॉ स्कूल के स्वयंसेवक, मीसा गुट्टेन्टैग थे। दूसरी ओर, बार एसोसिएशन के आठ गुस्सैल सदस्यों में इंटलेक्चुअल प्रोपर्टी, एंटीट्रस्ट, और साइंस और अड्मिनिस्ट्रेटिव लॉ सेक्शनों के प्रतिनिधिगण थे।

उनकी स्थिति स्पष्ट थी। हमें प्रस्ताव को वापस लेना होगा या बार का कोपभाजन बनना होगा। एंटीट्रस्ट अनुभाग के प्रतिनिधि ने कहा कि उसने मेरे द्वारा भेजे एंटीट्रस्ट जर्नल के उन सभी 75 लेखों को देखा है और वह यकिन के साथ कह सकता है कि प्रत्येक सरकारी । कर्मचारी ने उन लेखों को अपने निजि समय में लिखा था न कि सरकारी कामकाज के समय में। वह सरकारी काम नहीं था। मैंने उस विचार पर अपनी असहमति व्यक्त किया कि उन सभी लेखों में प्रत्येक लेख निजी संपत्ति थे। लेकिन वह अपनी बात पर अडिग था। मैंने उस लिस्ट में कम-से-कम 17 प्रकाशनों को गिना था, जो फेडरल ट्रेड कमीशन (एफ.टी.सी) के उपायुक्तों के द्वारा लिखा गया था। अब मैं यह देख कर काफी हैरान था कि कैसे एक कार्यरत अधिकारी के द्वारा बार को एफ.टी.सी की प्राथमिकताओं को अमल कराने के बारे में ब्रीफ करना “उनके सरकारी काम के अलावा कुछ और हो सकता था।

विज्ञान अनुभाग से एक महिला ने कहा कि यदि मैंने इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया तो वह मेरे खिलाफ स्वार्थों के टकराव (कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट) का मुद्दा उठाएगी। यह सुनकर मैं हैरान हो गया और मैंने उनसे पूछा कि वे किस स्वार्थ के टकराव की बात कर रहे हैं। तब उन्होंने कहा कि मैंने सरकार सूचना को उपलब्ध कराने में अपना पूरा करियर लगाया है और मैं जार्जिया सरकार के साथ मुकदमे लड़ रहा हूँ। इसलिए मेरा इसमें स्वार्थ है। लेकिन मैंने उन्हें इन मुकदमों के बारे में नहीं बताया हैं। उन्होंने यह बात काफी गंदे और घिनौना तरीके से कहीं और मैं अब इस बारे में स्पष्ट था कि वह अपने इस रुख को सदन तल पर प्रस्तुत कर सकती हैं।

इंटलेक्चुअल प्रोपर्टी अनुभाग के प्रतिनिधियों ने हर बात बहुत घुमाकर बताया, और कहा है कि मैंने कानून को पूरे गलत तरीके से समझा हूँ। क्योंकि कर्मचारियों के लेख यद्यपि सरकारी काम हैं, लेकिन जब वह पेज नंबरों के साथ एक फॉन्ट में टाइप होता है तो इस पर प्रकाशक के कापीराइट की परत लग जाती है। हांलाकि इसका बीज (कोर) पब्लिक डोमेन

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