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कोड स्वराज

का हो। इसलिए प्रकाशकों के कॉपीराइट का उल्लंघन किए बिना काम करना संभव नहीं था। मेरा मानना था कि यह बकवास है और अमेरीकी कॉपीराइट अधिनियम इसे समर्थन नहीं करेंगा। फॉन्ट के चयन या पृष्ठ पर अंक लगने में कोई कॉपीराइट नहीं है, केवल एक वास्तविक सह-लेखक ही कॉपीराइट में हिस्सा लेने का हकदार है।

अब, मैंने चर्चा को सिर्फ कानून की बातों से पूरी नहीं की है। यह गहन अनुसंधान पर आधारित था और इसकी समीक्षा कॉपीराइट विशेषज्ञों के एक विशिष्ट पैनल द्वारा की गई थी, जो इस परियोजना के लिए मेरे सलाहकार बोर्ड में शामिल हो गए थे। मैं इस बात से आश्वस्त था कि हमारे पास कानूनी अधिकार थे। हम सिर्फ हवा में बाते नहीं कर रहे थे।

यह स्पष्ट था कि सदन में बहस के जरिए हमें घसीटा जाएगा। मैं इसे सहन कर सकता था, लेकिन हालत इससे भी बदतर थी। उन्होंने मुझे सूचित किया कि कम से कम आठ अनुभागों ने अपने प्रतिनिधियों को प्रस्ताव का विरोध करने के लिए पहले से ही कह दिया है। इसलिए इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं कितना वाकपटु या समझाने-बुझाने की शिश करू, वटि पहले से ही निधारित था। मुझे लगता है कि वे प्रत्येक विषय बिन्दु पर गलत थे, लेकिन मुझे यकिन था कि, जब हम इसे प्रतिनिधिमंडल सभा (House of Delegates) के पटल पर प्रस्तुत करेंगे तो वे हमें बुरी तरह हरा देंगे। मुझे जीत के कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे थे और मैंने निर्धारित तारीक से दो दिन पहले, अपनी न्यूयॉर्क यात्रा रद्द कर दी।

पैसों की समस्या पुनः उभरी

अपनी कड़ी हार को झेलने के लिये मैं प्रतिनिधि सभा में जा सकता था लेकिन मुझे दूसरे मसलो को भी देखना था। मैंने अपने 2,50,000 डॉलर के अनुदान पर ज्यादा सावधानी बरती थी, जिसका दो तिहाई पैसा खर्च हो चुका था। मेरा विचार था कि हम ए.बी.ए की बैठक के बाद इसे खर्च करेंगे। चर्चा क्या रूप लेती है, इसके आधार पर हम अपने खर्चे का निर्धारण करेंगे। जून के प्रारंभ में मैंने फॉउनडेशन को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। उन्हें जुलाई 31 को हमारी दूसरी किश्त का भुगतान करना था। रिपोर्ट सौंपने के बाद मेरी प्रोग्राम मैनेजर या फॉउनडेशन के अनुदान स्टाफ से इससे संबंधित कोई बात नहीं हुई। इस कारण मैंने कई बार उनसे यह पूछा कि क्या रिपोर्ट उचित थी, क्या हमने सही काम किया था। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट ठीक थी।

जैसे ही 31 जलाई करीब आई. मैंने अपने बैंक खाते की बार-बार जांच की, लेकिन राशी जमा नहीं हुई थी। फिर उनके भुगतान करने की तारीख से दो दिन पहले, मुझे एक नोट मिला कि वे भुगतान नहीं करेंगे। इसका कारण यह था कि हमने अनुदान का पालन नहीं किया था क्योंकि हमने पर्याप्त पैसे खर्च नहीं किए थे। मुझे यह बताते हुए विस्तृत बजट प्रस्तुत करना था कि पूर्वानुमान का पालन करने में हमसे कहाँ चूक हुई थी। उसमें यह भी उल्लेखित करना था कि हमने पैसे कहाँ खर्च किए। इस बात का भी कोई संकेत नहीं था कि यदि मैं सफलतापूर्वक हमारी भविष्य की योजनाओं को विस्तार से बताता, तो दूसरा भुगतान स्वीकृत हो जाएगा। दूसरे शब्दों में, अपने संगठन को प्रभावी रूप से चलाते हुए हमारा

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