पृष्ठ:कोड स्वराज.pdf/१४७

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कोड स्वराज पर नोट

दूसरी ओर, मैंने व्हाइट हाउस में जॉन पौडेस्टा के सहायक से यह सुना है कि वेस्ट विंग के मैल डिलवरी स्टाफ को मेरे पैकेज के मिलने पर बड़ा मजा आया। संयक्त राज्य अमेरिका के अभिलेखाध्यक्ष को पैकेज काफी पसंद आया और उन्होंने मुझे मेल भेजा इसमें लिखा था “अत्यंत मनोहर प्रस्तुति”। अमरीका के कांग्रेस की सदस्य डैरेल इज़ा (Darrell Issa), झिंकल-पैक से बने अमेरिका के झंडे को देखकर काफी प्रभावित हुई और उन्होने उसकी तस्वीर को ट्विट किया। फेडरल ट्रेड कमीशन के चेयरमैन, जॉन लीयूबॉड्स (Jon Leibowitz) ने मुझे पत्र भेजा कि उन्हें पैकेज का काम काफी पंसद आया और वे इस बात से दोगुने प्रसन्न हैं कि प्रसिद्ध ब्लॉग बॉइंग बॉइंग (Boing Boing) ने इस कहानी को साझा किया है और उस पर मेरे कानून का ज्ञापन (मेमोरेंडम आफ ला) प्रिंट किया। उसे क्या पता कि एफटीसी के चेयरमैन उन ब्लॉगों को पढ़ेंगे?

सब लोगों की पहुँच, मानवीय ज्ञान तक बनाना

पैसे समाप्त होने पर और एबीए से बड़ा झटका लगने के कारण मेरा दिल 'सरकारी कामों परअपनी रिपोर्ट लिखने में नहीं लग पा रहा था। यह रिपोर्ट दर्जनों प्रकाशकों को भेजी जानी थी जिसमें मेरे शोध का निष्कर्ष होना था कि वे किसी-न किसी रूप में कानून का उल्लघंन कर रहें हैं। हालांकि इसके कुछ अन्य कारण भी थे। मैं अपनी रणनीति पर फिर से विचार कर रहा था।

मैंने इस अनसंधान में तीन मख्य प्रश्नों को उठाया था। पहला, इस उठ रहे मद्दे का काननी विश्लेषण करना था। इस कार्य को तो मैंने पूरा कर लिया था। दूसरा, सरकारी कार्यों की पहचान करना था। इस बार फिर, हम अपने मूल्यांकन से आश्वस्त महसूस कर रहे थे। तीसरा, जर्नल्स के आर्टिकल्स की प्रतिलिपियाँ प्राप्त करना था। मेरी प्रारंभिक विचार यह थी कि हमें पुस्तकालय मिलेंगे जहाँ से हम पत्रिकाएं उधार ले सकें और फिर इंटरनेट आर्काइव से स्कैनिंग कर सकेंगे। इस विशाल कार्य को पूरा करने के लिए हमारे बजट का अधिकांश अनुदान, पुस्तकालयों और इंटरनेट आर्काइव पर होने वाले खर्यों पर आधारित था।

लेखों को एक एक करके निकालने का काम मुश्किल हो सकता है। हालांकि पुस्तकालय के लिए यह कार्य करना कुछ हद तक जोखिम भरा भी हो सकता है फिर भी उनमें से दो पुस्तकालय इस कार्य को करने पर विचार कर रहे थे। चूकि ये सभी लेख डेटाबेस में हैं और ये इलेक्ट्रनिक तरीके से उपलब्ध हैं इसलिए इनका स्कैनिंग करना, एक मायने में अनावश्यक कार्य था। कोई व्यक्ति प्रकाशक की साइट पर सीधा लॉग इन नहीं कर सकता है, क्योंकि वहां मौजूद जानकारियों को प्रयोग करने के कुछ कानूनी नियम और तकनीक प्रतिबंध होते हैं जिनसे अध्ययनशील अनुसंधान बाधित होता है। इसका प्रयोग केवल सीमित तरीकों से ही किया जा सकता है।

ज़ाखिस्तान की एलेक्जांड़ा एल्बाक्यान (Alexandra Elbakyam) नामक यवा वैज्ञानिक को भी इसी तरह की समस्या थी, और यही समस्या उसके जैसे विश्व भर में फैले उनके कई सहयोगियों और सहकर्मियों की भी हैं। ज्ञान को बंद कर दिया गया था, जो विशिष्ट विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे अमीर लोगों तक तो पहुंच रहा है लेकिन अधिकांश विश्व उससे

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