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कोड स्वराज

काफी संभावित लक्ष्य है और इसमें कुछ वर्षों का समय लग सकता है। यह भारत के भावी शिक्षा में एक बेहतरीन निवेश साबित हो सकता है।

जब राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपना पद संभाला तो मैंने जॉन पॉडेस्टा (John Podesta) से संपर्क किया और हमने उसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा। मैंने उस पत्र को, राष्ट्रपति के मुहिम के नारे “हाँ, हम कर सकते हैं (Yes We Can)” पर आधारित । YesWeScan.Org नाम की वेबसाइट पर डाल दिया। पत्र की सबसे आकर्षित पंक्ति थी-यदि हम किसी व्यक्ति को चाँद पर भेज सकते हैं तो हम कांग्रेस की लाइब्रेरी को साइबर स्पेस पर भी डाल सकते हैं। चूंकि जॉन मेरे सह-लेखक थे, प्रशासन ने आर्किविस्ट डेविड फेरिएरो (David Ferriero) के माध्यम से एक अच्छा उत्तर तो दिया लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ। मैंने नई डिजिटल पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ अमेरिका जैसे आकांक्षापूर्ण लक्ष्य में रूचि दिलाने का प्रयास किया लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ। मुझे यह उम्मीद है कि भारत इस चुनौती का सामना करेगा और आनेवाली पीढ़ी को शिक्षित करने के लिए एक ज्ञान मंदिर का निर्माण करेगा।

3. सरकार के अध्यादेश। तीसरा प्रयास, सरकार की पत्रिकाओं/फ़रमानों को आधुनिक बनाना। इसमें सरकार के अन्दर और अन्य मूलभूत क्षेत्रों में जैसे कि आधिकारिक राजपत्र । में, समर्थन मिलने की उम्मीद लगती है। लेकिन इस क्षेत्र में अधिक प्रयास की आवश्यकता है। राजपत्र के पुराने अंकों उनके रहस्यमय तकनीकी इंटरफेसों से बचाना है। इससे महत्वपूर्ण यह है कि राजपत्रों, नियमों, अधिनियमों, उपनियमों और सरकार के अन्य ने व्यापक रूप से उपलब्ध कराना लेकिन ऐसा तभी संभव है जब सरकारी कार्यकारी इन सामग्रियों को प्रकाशित करने को, एक लाभकारी प्रयत्न के रूप में देखेगी। हमें उन्हें उसी तरह से शिक्षित करना चाहिए जैसे हम स्वयं को शिक्षित करने में लगे हैं।

हम सरकार के अध्यादेश को व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के लिए दो प्रयास कर सकते हैं। पहला तकनीकी कार्य है और वह है, राज्यों और नगरपालिकाओं के सभी राजपत्रों की एक प्रतिलिपि को प्रकाशित करना, और इसमें वर्तमान ऑनलाइन फाइलों के अलावा इनके पुराने ऐतिहासिक संस्करणों को भी स्कैन करना। उपलब्ध ऑनलाइन राजपत्र का मिरर बनाना एक मुश्किल कार्य है लेकिन इसे एक छोटे पर अनवरत प्रयास से किया जा सकता है।

एक अन्य गतिविधि जो उपयोगी साबित हो सकती है वह है, सम्मेलन या कांग्रेस या किसी अन्य समारोह के लिए, सरकार के, विधि के, और तकनीकी दुनिया के प्रतिभागियों को। एकत्रित करना। यहां, आधिकारिक पत्रिकाओं के प्रकाशन तंत्र को आधुनिक बनाने, और कानूनों को व्यापक रूप से प्रकाशित करने के लिए कुछ वैधानिक परिवर्तनों की आवश्यकता है। और इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसके लिये कुछ प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक परिवर्तनों की आवश्यकता पड़ सकती है। भारत में ऐसे लोगों को साथ लाना है, जो सरकार के आदेशपत्रों के साथ काम करते हैं, और उसके साथ वैसे लोगों को भी ना है जिनके पास वैसी तकनीकी दक्षता हो जैसा कि उन लोगों के पास था जिन्होने यू.के. का सिस्टम बनाया था, और तब शायद कुछ ठोस कदम लिये जा सकते हैं।

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