पृष्ठ:कोड स्वराज.pdf/१६९

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कोड स्वराज पर नोट

4. हिंद स्वराज- यह चौथा क्षेत्र है, हिंद स्वराज के समृद्ध इतिहास के शानदार दस्तावेजों को प्रकाशित करना, यह मुझे व्यक्तिगत रूप से पसंद है। मैं उसे संग्रह में शामिल करने के लिए काफी उत्साहित हूँ। यहां पर कुछ मुद्दे हैं। महात्मा गांधी के कार्यों पर तकनीकी प्रयोगऔर कॉपीराइट के माध्यम से कई बार नियंत्रण करने का प्रयास किया गया है। स्वतंत्रता संग्राम का संपूर्ण विवरण और सभी स्रोत दस्तावेज और संविधान निर्माताओं के कथनों को उपलब्ध कराना चाहिए। विशेष रूप से जब सामग्रियों का विकास, सरकारी धन के माध्यम से किया गया था।

यहाँ तक की साबरमती आश्रम भी महात्मा गांधी के संकलित कार्यों के कॉपीराइट पर अपने स्वामित्व का दावा करता है और उनके प्रयोग पर तकनीकी सीमाएं लगाता है। मुझे इस बात को स्वीकार करना चाहिए कि जब मैंने महात्मा गांधी के संकलित कार्यों की पीडीएफ फाइलों को प्राप्त किया था तो मैंने उन पर से सुरक्षात्मक प्रतिबंध (ताकि लोग प्रत्येक पेज को अलग से निकाल सक) को, और उस पर लगे जलचिह्नों (वाटरमाक्सी को, जो प्रत्येक पृष्ठ पर लगे थे, हटा दिया। मेरा मानना है कि वे सब चीजें इन पृष्ठों को खराब कर रहे थे।

मैंने साबरमती आश्रम को, गांधीजी के पोर्टल से संबंधित सामग्रियों को अप्रतिबंधित करने के लिये एक प्रार्थना पत्र भेजा है ताकि हम इसमें, हिंद स्वराज के, बिना जलचिहु और बिना तकनीकी प्रतिबंधों के प्रति को संलग्न कर सकें। इस विषय पर उन लोगों से बात होने की उम्मीद है, जो भारत में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सामग्रियों के संरक्षक हैं। मैं संकलित कार्यों में लगने वाले कुछ प्रतिबंधों की आवश्यकताओं को समझता हूँ, जो उस कार्य की अखंडता की रक्षा करने और उनके दुरुपयोग न होने के लिए आवश्यक हैं। लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता है कि इन ऐतिहासिक कार्य को लॉक करके इनके दुरूपयोग को रोका जा सकता है। क्योंकि इससे वे केवल इसके वैधिक उपयोग को ही हतोत्साहित करेंगे। मेरा मानना है कि हमें इस पर अगले कुछ वर्षों तक चर्चा करनी होगी क्योंकि हम सभी का एक ही उद्देश्य है।

5. फोटोग्राफिक रिकॉर्ड ऑफ इंडिया। यह ऐसा पांचवा कार्यक्षेत्र है जिसके बारे में मेरा मानना है कि हमें बेहतर फोटोग्राफिक रिकॉर्ड ऑफ इंडिया प्रदान करने के लिए कार्य करना चाहिए। हमें सूचना मंत्रालय के सर्वर पर निम्न गुणवत्ता की तस्वीरें मिली, फिर भी वे तस्वीरें काफी बेहतर थीं। भारत के अनगिनत फोटोग्राफिक आर्काइव हैं जिनमें उच्च गुणवत्ता वाले स्कैन की गई तस्वीरें लगी हुई हैं पर वे पैसे की दीवार (पे-वाल) के पीछे बन्द हैं। यहां अनेक जगहों पर विस्मयकारी संग्रह मौजूद हैं, जैसे कि ब्रिटिश लाइब्रेरी।

मेरा मानना है कि उच्च गुणवत्ता वाले डेटाबेस का विकास करना सार्थक उद्देश्य है, जिसका प्रयोग प्रिंट से लेकर वेब तक किया जा सके और उस डाटाबेस को बिना किसी प्रतिबंध के उपलब्ध किया जा सके। यह मुश्किल कार्य नहीं है। उदाहरण के लिए सूचना मंत्रालय के फोटोग्राफिक रिकॉर्ड को आसानी से उपलब्ध किया जा सकता और उसके प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने का कोई कारण नहीं है।

6. आकाशवाणी । छठ्ठा, मैं आकाशवाणी पर महात्मा गांधी के जीवन के अंतिम वर्ष के, 129 भाषणों को पाकर एकदम विस्मित था। नि:संदेह आकाशवाणी की तिजोरी (वाल्ट) में और भी अनेक उपयोगी सामाग्रियाँ होंगी। उनमें से कुछ को संगीत या अन्य सामग्री की

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