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कोड स्वराज पर नोट

9. आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान;

10. लोकतांत्रिक जानकारी का व्यापक और आकांक्षात्मक लक्ष्य;

पारंपरिक ज्ञान और जैविक लुटेरे (बायोपाइरेट्स)

पारंपरिक ज्ञान मेरे लिए बिल्कुल नया क्षेत्र था, जिसे मैंने विस्तृत रूप से नहीं पढ़ा था। वर्ष 2017 अक्टूबर में मैंने सैन फ्रांसिस्को से फ्लाइट ली और सैम ने शिकागो से फ्लाइट ली।हम दिल्ली हवाईअड्डे पर मिले और वहां से सीधे बेंगलुरु गए। हमें पहले एक आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय और अस्पताल जाना था, जहां सैम इस संगठन के कुलपति थे। इस संगठन को उन्होंने 30 साल पहले अपने दोस्त दर्शन शंकर के साथ मिलकर शुरू किया था।

भारतीय संस्कृत पाठयों में आयुर्वेद को चिकित्सा का पारंपरिक विज्ञान माना जाता है। समय के साथ यह परिष्कृत होता गया। इसके चिकित्सकों को वैद्य के रूप में जाना जाता है। यूनानी चिकित्सा परम्परा, आयुर्वेद से संबंधित थी। यह प्राचीन चिकित्सा परंपरा अरबी और फारसी दुनिया से आई थी। इसका अभ्यास मुस्लिम हकीमों द्वारा किया जाता था।

जब सैम अपने बोर्ड और प्रोफेसरों के साथ काम में व्यस्त थे, तो मैं इधर उधर घूमने लगा। ट्रांस डिसिप्लिनरी यूनिवर्सिटी (टीडीयू) एक आकर्षक स्थान हैं। भारत में 6,500 से ज्यादा औषधीय पौधों का इस्तेमाल किया गया है और यह प्राचीन ग्रंथों में प्रलेखित हैं। टीड़ीयू में 1,640 से अधिक प्रजातियां उगाई जा रही हैं। एक बड़े वनस्पति संग्रहालय में, 4,500 से अधिक प्रजातियों को संरक्षित और एकत्रित किया गया है।

टीडीयू पारंपरिक पाठ्यों और सिद्धांतों के विस्तृत ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ता है। 50 से अधिक पीएचडी विद्यार्थी यह समझने की कोशिश करते हैं कि आयुर्वेद की प्राचीन तकनीकें कैसे और क्यों काम करती हैं (या काम नहीं करती हैं। हाल ही में स्कूल ने स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किया है। यह एक बड़ा अस्पताल भी चलाता है। इसके अलावा टीडीयू, 6,500 औषधीय पौधों, सूत्रीकरण (फारमुलेशन), औषध विज्ञान, फार्मास्यूटिकल सिद्धांतों और विधियों, चिकित्सा विज्ञान, रोगजनन, जैव-नियमन और आयुर्वेदिक विज्ञान के अन्य पहलुओं के कम्प्यूटरीकृत डेटाबेस का संचालन करता है।

मैंने इस तरह के शोध के कई उदाहरण देखे हैं। उदाहरण के लिए, ऐसे कई अध्ययन हैं जो बताते हैं कि कुछ खाद्य पदार्थ लंबी उम्र का इजाफा कर सकते हैं। कुछ लोकप्रिय अध्ययनों ने इस गुण को रेड वाइन में बताया है। आयुर्वेद में, अनार ऐसे गुणों के लिए ही जाना जाता है। आयुर्वेद की एक शाखा जिसे रसायन कहा जाता है वह दीर्घायु विज्ञान के नाम से जाना जाता है।

एक पीएचडी छात्र ने इस प्रस्ताव का परीक्षण करने के लिए ड्रोसोफिला (फल मक्खी) पर प्रयोग किया। कुछ मक्खी को रेड वाइन दिया गया और अन्य को अनार का रस दिया गया और बाकी नियंत्रित समूह में थे। यह देखना था कि ये मक्खियाँ एक कंटेनर पर कितनी दूर तक चढ़ सकती थी, जो उनके जीवन शक्ति और सामर्थ्य को मापता था। छात्र ने पाया कि मक्खी पर आहार के अनुपूरण ने न केवल उनके जीवन अवधि ही नहीं बढ़ाई बल्कि

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