पृष्ठ:कोड स्वराज.pdf/२०१

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परिशिष्टः पारदर्शिता कब उपयोगी होती है?

निगम है, जिसने आपके चुनाव अभियान के लिए धन की व्यवस्था की है। वास्तव में ऐसी स्थिति में आप, किसी भी एक पक्ष की अत्यधिक नाराज़गी, सम्हाल नहीं सकते हैं। इसलिए, कांग्रेस समझौता कराने का प्रयास कराती है। इस तरह की समझौता का उदाहरण है, ट्रांसपोर्टेशन रिकॉल एन्हांसमेंट, अकांउटबिलिटी, एंड डॉक्मेंटेशन (टी.आर.ई.ए.डी) अधिनियम। सुरक्षित कारों की मांग के बजाय, कांग्रेस कार कंपनियों से यह अपेक्षा करती है कि उनकी कार की किन किन स्थितियों में लुढ़कने की संभावना है इसका वे रिपोर्ट करें और यह है पारदर्शिता की फिर से जीत!

या, एक और ज्यादा प्रसिद्ध उदाहरण यह है: वाटरगेट कांड के बाद, लोग इस बात से काफी खिन्न थे कि राजनेताओं को बड़े निगमों से लाखों डॉलर मिलते हैं। लेकिन, दूसरी ओर निगम, राजनेताओं को धन उपलब्ध कराने में काफी तत्पर रहते हैं। इसलिए इस परिपाटी पर रोक लगाने के बजाय, कांग्रेस ने केवल यह मांग की कि राजनेता ऐसे सभी लोगों पर नज़र रखें, जो उन्हें धन मुहैया कराते हैं, और वे इसका एक रिपोर्ट सार्वजनिक निरीक्षण के लिए पेश करें।

मुझे इस तरह की परिपाटी बहुत ही हास्यास्पद लगती है। जब आप एक नियामक (रेगुलेटरी) एजेंसी बनाते हैं, तो आप ऐसे लोगों का समूह बनाते हैं जिनका कार्य कुछ समस्याओं का हल करना होता है। उन्हें उन लोगों की जांच करने का अधिकार दिया जाता है, जो कानून तोड़ रहे हों और उन्हें ऐसा प्राधिकार (आथोरिटी) दिया जाता है कि वे उन । लोगों को दंडित कर सकें। दूसरी ओर, पारदर्शिता ऐसे कार्यों को सरकार को देने के बजाय औसत नागरिकों को सौंप देती है, जिनके पास ऐसे प्रश्नों को जांच करने के लिए, न तो समय है और न ही क्षमता। और उनेके द्वारा इसके बारे में कुछ कदम उठाना तो दूर की बात होगी। यह एक तमाशा है। जिससे ऐसा लगता है कि कांग्रेस इस महत्वपूर्ण मुद्दे के बारे कुछ कार्य कर रही है, लेकिन निगम प्रायोजकों (स्पोन्सस) को बिना किसी खतरे में डाले।

डेटाबेस की विवेचना करना, जनता के लिए

यह वह स्थिति है जब बीच में प्रौद्योगिकीविद आते हैं। “कुछ चीजों के बारे में आम जनता को ठीक से समझना जरा मुश्किल होता है?” उनसे यह सुनने को मिलता है कि “हमलोग जानते हैं उसे कैसे ठीक करना है” इसलिए वे डाटाबेस की एक कॉपी डाउनलोड करते हैं और आम जनता के उपयोग के लिए इसे इन्टरनेट पर डाल देते है - इसके सारांश आंकड़े तैयार कर के, उसके आस-पास सुंदर चित्रों को डाल कर के, और इसमें कुछ खास सर्च और विजुअलाइजेशन की विशेषता के साथ। अब जांच करने वाले नागरिक, इंटरनेट पर जाकर इस बात का पता लगा सकते हैं कि उनके राजनेताओं को वित्तीय सहायता कौन कर रहा है, और उनकी कार कितनी खतरनाक हैं।

सुस्त लोग इसे पसंद करते हैं। हाल ही के अनेक विनियमनहीनता (डीरेगुलेशन) से प्रभावित और सरकार विरोधी भावना से ओतप्रोत लोग, सरकार के प्रति शंकित रहते हैं। उनका कहना है कि “हम नियामकों (रेगुलेटरों) पर विश्वास नहीं कर सकते हैं”। “हमें स्वयम् उन आंकड़ों की विवेचना करनी होगी”। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रौद्योगिकी कोई सटीक

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