पृष्ठ:कोड स्वराज.pdf/२०५

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परिशिष्टः पारदर्शिता कब उपयोगी होती है?
 


उत्तर खोजने के लिये जिसकी जांच दूसरे लोग कर रहे हों। इसका उपयोग कोई उत्पाद बनाने के लिये नहीं होगा बल्कि यह किसी अन्वेषण की प्रकिया में भाग लेने के लिये उपयोगी होगा।


लेकिन इसे तभी किया जा सकता है जब इस जांच दल के सदस्य अन्य लोगों के साथ मिलकर काम करते हैं। वे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सब कुछ कर सकते हैं, बशर्ते कि वे “प्रौद्योगिकी”, “पत्रकारिता” और “राजनीति” के श्रेणियों में बंटे न हों।


अभी, प्रौद्योगिकीविज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि वे किसी भी मुद्दे पर डेटा का पता लगाने के लिए निष्पक्ष मंच का निर्माण कर रहे हैं। पत्रकार इस बात पर जोर देते हैं कि वे तथ्यों पर नजर रखने के लिए प्रवेक्षक रहते हैं। राजनीति से संबंधित लोग यह सोचते हैं कि उन्हें पहले से ही उत्तर पता है और उन्हें किसी ओर प्रश्नों की जांच करने की आवश्यकता नहीं है। ये सभी अपनी अपनी सीमाओं तक सीमित हैं, और वे बड़ा परिदृश्य नहीं देख पा रहे हैं।


मैं भी था। मैं इन मुद्दों के बारे में काफी गंभीर हूँ - मैं भ्रष्ट राजनेता नहीं चाहता हूँ; मैं नहीं चाहता था कि कारे लोगों की जान लें, और एक प्रौद्योगिकीविज्ञ के रूप में मुझे इनका समाधान करने में खुशी मिलेगी। इसलिए मैं पारदर्शिता की मांग की बहाव में बह गया। मैं उन चीजों को करने जैसा लगा, जिसे मैं बहुत अच्छे तरीके से कर सकता हूँ - जैसे कि कोड लिखना, डेटाबेस की जांच करना- मुझे लगा कि इससे मैं दुनिया को बदल सकता हूँ।


लेकिन यह कुछ ज्यादा काम नहीं करता है। डेटाबेस को ऑनलाइन डालने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता है क्योंकि पारदर्शिता शब्द सुनने में जितना अच्छा लगता उतना वास्तव में नहीं होता है। लेकिन यह स्वयं को भ्रम में डालने के लिए अच्छा था। मुझे सिर्फ यह करना था कि चीजों को ऑनलाइन कर देना, और फिर यह सोचना कि कहीं न कहीं कोई व्यक्ति उसे जरुर उपयोगी पायेगा। आखिरकार, प्रौद्योगिकीविज्ञ तो ऐसे ही काम करते हैं, है ना? वर्ल्ड वाइड वेब की खबरों का प्रकाशन करने के लिए डिजाइन नहीं किया गया था बल्कि इसे निष्पक्ष प्लेटफोर्म के रूप में डिजाइन किया गया था, जो किसी भी तरह के प्रकाशन के लिये, वैज्ञानिक प्रकाशन से लेकर अश्लील साहित्य तक के प्रकाशन के लिये, सहायक होगा।


राजनीति इस प्रकार से काम नहीं करती है। एक समय था जब “न्यूयॉर्क टाइम्स” नामक समाचार पत्र के फ्रंट पेज पर किसी समस्या का विवरण इस बात की गांरटी होती थी कि अब उसे सुलझा लिया जाएगा, लेकिन यह सब अब पुरानी बात हो चुकी है। किसी मामले के सामने आना, उसकी जांच होना, उसकी रिपोर्ट आना और फिर उसे सुलझा देने की प्रक्रिया अब पूरी तरह खंडित हो चुकी है। प्रौद्योगिकीविज्ञों का पत्रकारों पर भरोसा नहीं रहा है ताकि वे उनकी सामाग्रियों का उपयोग कर सकें; पत्रकारों का राजनैतिज्ञों पर भरोसा नहीं रहा है कि वे उनके द्वारा उजागर किये गये समस्याओं का समाधान कर सकेगें। बदलाव हजारों लोगों के काम करने से नहीं होता, यदि वे सभी अपने अपने अलग तरीके अपनाते हैं। बदलाव के लिए, लोगों को एक सर्वमान्य उद्देश्य के लिए, साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। ऐसा प्रौद्योगिकीविज्ञ द्वारा स्वयम् करना बहुत ही मुश्किल है।

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