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साबरमती आश्रम के दौरे के नोट्स

आज जिस दुनिया में हम रह रहे हैं इसमें संरचात्मक बदलाव का एक मात्र तरीका है - हमारे राज-काज का तरीका, हमारी कानून व्यवस्था। हम इसे “कानून का राज” को। स्थापित करके कर सकते हैं। अमेरिका में गुलामी के अंत की शुरूआत 'द इमैन्सपेशन प्रोक्लेमशन' और संविधान के 13 वें संशोधन के बाद हुई थी।

अमेरिका में, तथाकथित गुलामी की औपचारिक समाप्ति की जगह, तुरंत ही खेत में बटाईदारी पर फसल लगाने के विरुद्ध हुए संघर्ष ने ले ली। भारत में, किसानों को बटाईदारी पर नील की खेती करने के लिये मजबूर किया गया था, और विदेशों में मजदूरों पर करारनामा (indenture) तंत्र को अपनाया जा रहा था जिसके विरुद्ध महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में लड़ाई लड़े चुके थे। भारत में अनैच्छिक दासता का अंत तब हुआ जब अंतत: गिरमिटिया नामक क्लिष्ठ तंत्र वर्ष 1917 के ‘इंडियन इमीग्रेशन एक्ट, 1917' के अधीन आया।

मतदान के अधिकारों के संघर्ष को, केवल मताधिकार के द्वारा ही समाप्त किया जा सकता है। रेसियल सेगरेगेसन (Segregation) को, संयुक्त राज्य अमेरिका में वर्ष 1964 के ‘नागरिक अधिकार अधिनियम (Civil Rights Act of 1964)' के साथ, और दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की समाप्ति के बाद ही संबोधित किया जा सका। प्रत्येक संघर्ष के अंत के साथ एक नए संघर्ष की शुरूआत होती है।

इन समस्याओं को किसी भी तरीके से हमेशा के लिए सुलझाया नहीं जा सकता है लेकिन हम इन्हें अनवरत संघर्ष के एक अभियान के रूप में देख सकते हैं। विश्व में दासता अब भी मौजूद है। संयुक्त राज्य अमेरिका सार्वजनिक मताधिकार का दावा करता है लेकिन मतदान कर (Poll Tax) की जगह अब ‘मतदान पहचान संबंधी कानून (Voter Identification Laws)' ने ले ली है, जो न तो अवास्तविक मतदाता धोखेबाजी (voter fraud) को कम करता है बल्कि उल्टे लोगों को, मतदान के लिए हतोत्साहित करता है।

यद्यपि हम लोग अपनी दुनिया को बिलकुल ठीक नहीं बना सकते हैं, हमेशा कोई-न-कोई बाधा हमें मिल ही जायेगी, फिर भी हमें अपने उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग करना चाहिए और उनमें जो सबसे शक्तिशाली तरीका है वह है 'कानून का राज' (Rule of Law)। लोकतंत्रिक समाज में हम अपनी सरकार का निर्माण करते हैं। हम लोग अपने नियमों और दायित्वों को परिभाषित करते हैं। हालांकि हमारी सरकार कभी कभार उदासीन और लापरवाह लगती है (और कभी कभी वे सचमुच में उदासीन और लापरवाह हो जाते हैं, लेकिन जब-जब हम अपने स्वामित्व का पुनः दावा करते हैं, और कानून के नियमों का उपयोग करते हैं तब वास्तविक बदलाव की शुरूआत हो जाती है।

'कानून का राज' के तीन सिद्धांत होते हैं। पहला सिद्धांत यह है कि कानून को पहले ही से लिख लेना चाहिए ताकि समय के साथ चलते चलते हम कानून को बनाते न जाएं और किसी पहले किये गये कार्य को, बाद में गैरकानूनी न घोषित कर दें। इस सिद्धांत की अर्थपूर्ण तरीके से व्याख्या, जॉन एड्मस (John Adams) ने की थी उन्होंने अत्यंत पटुता से कहा था कि “हम विधियों के साम्राज्य हैं, न कि इंसानों के राष्ट्र (we are an empire of laws, not a Ilation of Imen)”,

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