पृष्ठ:कोड स्वराज.pdf/५९

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कार्ल मालामुद की टिप्पणियां

विश्वभर में, युद्ध हो रहे हैं। अब केवल दो राज्यों के बीच ही हिंसा नहीं होती है बल्कि राज्य का लोगों के खिलाफ, और लोगों का एक-दूसरे के खिलाफ, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ, और कभी उन लोगों के खिलाफ हिंसा कर रहे हैं जो सिर्फ उनसे भिन्न दिखते हैं। यहाँ पर आंतकवाद के, चौंका देने वाले क्रूर कृत्य दिखाई दे रहे हैं।

यहाँ अकाल और बीमारी है, जिसे हम यदि इच्छा हो तो रोक सकते हैं।

हमारे ग्रह पर चौंका देने वाली हिंसा हो रही हैं। ऐसी हिंसा जिसे हम अतीत में अज्ञानता से किये होंगे, लेकिन हम अब वैसी हिंसा को पूरी जानकारी होने के बावजूद कर रहे हैं।

व्यक्तिगत रूप में, अपनी दिनचर्या में खोये रहना और उन चीजों को नजरअंदाज करना जो हमारी शक्ति से परे है, सार्वजनिक जीवन में भागीदारी लेने से दूर भागना, अपने नेताओं को उनकी जवाबदेही की याद दिलाने से कतराना, यह सब लुभावना लग सकता है लेकिन यह गलत है।

जॉन एफ कैनेडी ने कहा था कि यदि हम क्रांति के शांतिपूर्ण तरीकों को निष्कृय बना देते हैं, तो क्रांति के हिंसक रास्ते अवश्यसंभावी हो जाते हैं। मैं, आपको यह बताना चाहता हूं कि हमारी दुनिया में अराजकता के बावजूद, आशा भी है। इंटरनेट वैश्विक संप्रेषण को संभव बनाता है और विश्व तक सभी सूचनाओं को पहुंचाता है। ये क्रांति के शांतिपूर्ण साधन हैं। बशर्ते कि हम इन्हें अपनाते हैं।

शिक्षा का तात्पर्य है कि हम अपने समाज को कैसे बदले। हमें अपने बच्चों को शिक्षित करना चाहिए, हमें अपने शासकों को शिक्षित करना चाहिए। हमें स्वयं को शिक्षित करना चाहिए

जॉन एडम्स (John Adams) ने लिखा था कि अमेरिकी क्रांति तभी संभव हो पाई थी जब उसके संस्थापक ऐसे पुरूष और महिलाएं थे, जिन्हें इतिहास की जानकारी थी। उन्होंने कहा था कि “अज्ञानता और अविवेक दो ऐसे संगीन कारण हैं जो मानवता को विनाश के कगार पर ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र तब तक कार्य नहीं कर सकता है जब तक उसके नागरिक एक ज्ञाता नागरिक नहीं बन जाते। उन्होंने कहा था कि “हमें कोमलता से और सहजता से, ज्ञान के साधन को पल्लवित करने चाहिये। हमें पढ़ने, सोचने, बोलने और लिखने का साहस करना चाहिये। प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक श्रेणी के लोगों को सजग और सचेत हो जाना चाहिये ताकि वे अपनी बातों को प्रबलता से रख सकें।

भारत में जहाँ स्वराज्य के लिए साहसपूर्ण लंबा संघर्ष हुआ था जिसने नए राष्ट्र को जन्म दिया - ऐसा संघर्ष जिसने हमें नियति से मिलाया - ऐसा संघर्ष जिसने विश्वभर को कार्य करने के लिए प्रेरित किया - ऐसा संघर्ष जो शिक्षित नागरिकता पर आधारित थी। गांधीजी ने न्यायधीश रानाडे की बात दोहराते हुए कहा था कि हमें स्वयं को शिक्षित करना चाहिए ताकि हम अपने शासकों को चुनौती दे सकें।

जिन पुरूषों और महिलाओं ने आधुनिक विश्व में भारत का नेतृत्व किया, वे विशेषज्ञ, इतिहासकार और नेता भी थे। नेहरूजी द्वारा जेल में लिखी असाधारण पुस्तक को देखें। डॉ.

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