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कोड स्वराज

बहुत बात की जाती है, तो कोई तुरंत हनुमान की बात करने लगता है और कोई किसी और भगवान की बात करने लगेगा, सब कहते हैं कि यह हमारी विरासत है।

कोई भी भविष्य की बात नहीं करता है। हमारी विरासत महत्वपूर्ण है। हमें हमारी विरासत, कला, संस्कृति, संगीत पर गर्व है, और हम इनमें से बहुत कुछ को कम्प्यूटराइज़ करने के कोशिश कर रहे हैं।

15 साल पहले हमने 10 लाख पांडुलिपियों (मेनुस्क्रिप्ट्स) को डिजिटाइज़ किया। 15 साल, 40 साल, या 37 साल पहले, हमने कपिला वत्सायन के साथ इंदिरा गांधी संस्थान में लघु फ़िल्म (माइक्रोफिल्म) में अपनी कला को स्टोर किया। अब ये सभी कृतियां एक ऐसे स्थान पर सुरक्षित है, और जहां इन पर और अनेक कार्य हो सकते हैं। पहले हमारे पास उपयुक्त औजार / टूल्स नहीं थे, लेकिन अब चीजों को स्टोर करना बहुत ही सस्ता हो चुका है।

एक उदाहरण देता हूँ, एक समय मैंने 6-bit RAM 16 डॉलर में खरीदा था। आशा है कि आपमें से कुछ इसे समझ पाएंगे। मैंन चार-इनपुट नैंड (NAND) गेट्स खरीदे थे, जिनमें प्रत्येक की कीमत 37 डॉलर थी। जब इंटेल ने पहला माइक्रोप्रोसेसर डिजाइन किया, तब मैं वहीं पर था। इंटेल के सभी फाऊंडर्स, बॉब नॉसे, लेस्टर, होगन, गोर्डन मूर, मेरे मित्र हैं। पहला फोर-बिट-प्रोसेसर (four-bit processor) का इस्तेमाल हमने टेलीफोन के लिए किया था।

हमने सोचा था कि यह एक चमत्कार है। हमने सोचा, “हे भगवान, यह कितना शक्तिशाली यंत्र है। "

अब देखिये कि आपके पास क्या है। आपके पास गीगाबिट्स (Gigabits) और टेराबिट्स (Terabits) है, और आपके सेल फोन में भी बहुत सारी प्रोसेसिंग पावर है, और यही सेल फोन की प्रोसेसिंग पावर है जो आज भारत को बदल रही है। लेकिन आपको इसे उसी तरह बदलना चाहिए जिस तरह से आप इसे बदलना चाहते हैं, न किसी संयुक्त राज्य अमरीका में बैठे ऐसे व्यक्ति के अनुसार जो इसे अपने अनुसार बदलवाना चाहता है। हमें स्थानीय (लोकल) विषय वस्तु (कंटेंट), स्थानीय एप्लिकेशन, स्थानीय समाधान, और विकास के प्रारूप की आवश्यकता है। हमें विकास के उस प्रारूप की आवश्यकता है जो भारत के लिए प्रासंगिक हो, न कि विकास के उस प्रारूप की जो पश्चिमी देशों से अतीत में हमें मिला है या हमने लिया है।

यह बहुत ही दुर्भाग्यशाली है कि हर कोई संयुक्त राज्य अमरीका की तरह बनना चाहता है। यह मॉडल, न तो बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा सकता है, न टिकाऊ है, न इसे अपने । लिये पुनः डिजाइन किया जा सकता है, न यह दीर्घ काल तक चल सकता है। हमें विकास का भारतीय मॉडल गढ़ना चाहिए और गांधीजी यही चाहते थे। जब मैं युवाओं से बात कर रहा था, तो मैंने कहा, “क्या आप सभी जिलों के लिए डाटा सेट ला सकते हैं?” मैं सभी जिलों के लिए बस यह चाहता हूं कि सब कुछ ऑनलाइन उपलब्ध हों। न्यायालय के मामलें, पुलिस, अध्यापक, स्कूल, अस्पताल, डॉक्टर सभी के। मुझे

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