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कोड स्वराज

यह संग्रह ऑनलाइन है। गूगल ने इसे देखना शुरू कर दिया है। लोग भी इसे देखते हैं। लगभग आधे दर्जन लोगों ने हमें पत्र लिखा है और कहा है कि “अहा! आपके पास मेरी पुस्तक है।” यदि किसी ने संयुक्त राज्य अमेरिका के डी.एम.सी.ए. (DMCA) मानक के बारे में एतराज किया तो हमारा उत्तर है “कोई समस्या नहीं। ठीक है, हम इन सभी पुस्तकों को हटा देंगे।"

यूनिवर्सिटी ऑफ नोर्थ कैरोलिना प्रेस ने हमें एक पत्र भेजा। उनके पास 35 पुस्तकों की एक सूची थी। यह एक बेहतरीन पत्र था जिसमें उन्होंने कहा कि “हमें इस बात से आपत्ति नहीं है कि आपके पास हमारी पुस्तकें ऑनलाइन हैं। लेकिन अब हमलोग अपने पुराने फाइल को ऑनलाइन कर रहे हैं और इसे बेचने जा रहे हैं। इसलिए आपके पास वह नहीं होनी चाहिए।”

हमने उनकी सूची देखी और फिर अपना डाटाबेस सर्च किया। यह पाया कि हमारे पास उनकी कुछ और पुस्तकें भी हैं जो उन्होने नहीं देखा हैं। उन्हें एक पत्र लिखकर यह बताया और कहा कि “ये आपकी पुस्तकें हैं। यदि आपको कोई और समस्या है तो हमें सूचित । करें।” कुल मिलाकर हमने उनकी लगभग 127 पुस्तको, अब हटा दिया है, जो कोई बड़ी बात नहीं है।

रूस में एक आदमी था, जिसे ‘इंटरनेट आर्काइव' पर उसके पिता की पुस्तक मिली। वह ऐसे प्रोफेसर को जानता था जो ‘डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया में शामिल था। वह उनपर मुकदमा करने वाला था। उसे बहुत गुस्सा आया हुआ था। उसके चलते जिन वरिष्ठ लोगों ने इस परियोजना की शुरूआत की थी, वे डर गए और सरकार के पास गए। सरकार भी। परेशान हो गई। मुझे ऐसे पत्र मिलने लगे जिनमें लिखा था कि “आपको इन सभी पुस्तकों को हटाना होगा। आपको यहाँ से हटाना ही होगा।

मैंने सोंचा “नहीं, मैं ऐसा नहीं करूंगा।" और तब वास्तव में उन्होंने अपने सर्वर को डाउन कर दिया। इसलिए अब हमारे पास इंटरनेट पर, ‘डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया' की। एकमात्र प्रतिलिपि है। मैंने पुनः इसका नामकरण किया क्योंकि वे चिंतित थे कि हम उनसे किसी न किसी रूप में उनसे जुड़े हुए हैं। मैंने कहा “ठीक है, ये पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ इंडिया है।” इसलिए उन्होंने पहले सभी पुस्तकों को हटा दिया, उसपर आप मेटाडाटा को सर्च कर सकते हैं लेकिन आप पुस्तक नहीं प्राप्त कर सकते हैं।

फिर उन्होंने नीचे देखा। वहां एक नोटिस था। उसमें लिखा था कि “कॉपीराइट अतिक्रमण की वजह से यह अभी उपलब्ध नहीं है। जल्दी ही फिर उपलब्ध होगी।” और मेटाडाटा फिर से उपलब्ध हो गया, पर सवेर एकदम गायब हो गया और कॉपीराइट नोटिस फिर से आ गया। और अभी यह फिर से गायब है। नेट से यह पूर्णतः गायब है।

मैंने जो समझा वह यह है कि सरकारी अधिकारियों का एक समूह इन 10 विभिन्न पुस्तकालयों और इन स्कैनिंग केंद्रों में फैल गए, जहां पर वे पुस्तकें प्राप्त कर सकते थे। वे इस सूची को ध्यान से देखते थे और निर्णय लेते थे कि इन में से कौन-सी पुस्तक उपलब्ध

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