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पृष्ठ:कोशोत्सव-स्मारक-संग्रह.pdf/१४१

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हिंदी साहित्य के इतिहास के अप्रकाशित परिच्छेद दरबार में हिंदी कवियों का बड़ा जमाव रहता था । आपका लिखा हुआ 'नव रस' नामक एक हिंदी संगीत-विषयक ग्रंथ पाया जाता है । ६- जयराम - कवि छत्रपति शिवाजी महाराज के पिता शाहूजी महाराज के दरबारी कवि थे । ये महाराष्ट्रीय, किंतु भारतवर्ष की भन्न वारह भाषाओं के ज्ञाता थे। इनका लिखा हुआ राधा-माधव-विलास चंपू काव्य हाल ही में उपलब्ध होकर प्रकाशित हुआ है। उससे कई महाराष्ट्रीय ऐतिहासिक घटनाओं के अतिरिक्त हिंदी साहित्य के एक अज्ञात भाग पर भी बड़ा प्रकाश पड़ा । पिछले दिनों हिंदी में कुछ लोगों के प्रयत्न से यह बात उठाई गई थो कि छत्रपति शिवाजी के दरबार में भूषण जैसे हिंदी कवि का राजदरबारी कवि होना असंभव है; प्रत्युत भूषण शिवाजी के सम- कालीन ही नहीं थे । इस ग्रंथ से तो भूषण के प्रति शिवाजी ही के क्या, वरन छत्रपति के पिता शाहजी के दरबार में तक, पचास हिंदी कवियों के आश्रय पाने का पता चलता है । इस ग्रंथ कं द्वारा शाहजी के दरवारी ३८ हिंदी कवियों का पता चल चुका है; जिनका विशद वर्णन हमने समालोचक की प्रोष्म संवत् १८८३ की संख्या में किया है ! जयराम की रचना भी बड़ी सरस हैं, यथा-- जगदीश विरंचि का पूछत है, कहु सृष्टि रची रखि कौन कहाँ । कर जोर कही जयराम विरंचि तिरलोक जहाँ के तहाँ || ससि बो अरु पूरब पच्छिम लो तुम सोय रहो सर सिंधु महा । अरु उत्तर दच्छित रन्छिन की इस साहिजू हैं उ साहिजहाँ ||४|| ग्रंथ के अंतर्गत प्रमाणों से इसकी रचना का शार्क १५७५ में होना सिद्ध है। इस ग्रंथ में कवि जयराम ने अपने समकालीन प्राय: ४० कवियों की हिंदी समस्या-पूर्तियों के उदाहरण दिए हैं । - १०- रघुनाथ व्यास — इसने शाहजी के शैौर्य के कारण शत्रु स्त्रियों की दशा के विषय में लिखा है कि- बालम की बाट लखें बारबार बावरी सी, बैरिन की वधू फिरें बेरन के बन में ||