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पृष्ठ:कोशोत्सव-स्मारक-संग्रह.pdf/१५०

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श्री भास्कर रामचंद्र भालेराव याही नारायन लौकिक पानी । ले १८७ प्रच्छालत लावत पानी || जासे प्रकट भयो हैं अंवर ताको अंबर : ताको पोंछति लेके अंबर || शिव बिधि करत चरन-रज इच्छा | माता करत स्वपद-रज रच्छा || विधि उपदेस करन में मारे | माता श्रवन फूँक जल डारे || माधव श्रीपति ईश निरंजन वा हग माता डारत अंजन ६- अनंत कवि-राजपूताने के भाट चारण की तरह महा- राष्ट्र में भी गोंधली जाति के लोग वीर तथा शृंगार के पद गाकर स्वराज-उपभोगियों का दिल रिझाते थे । ये जाति के ब्राह्ममा, परंतु आपने भी वही पेशा अख्तियार किया था। इनके हिंदी उत्तान ( अश्लील ) शृंगार तथा वीर रस पूर्ण पद पाए जाते हैं। इन्हीं के साथी कविवर राम जोशी, होना जी, सगन भाऊ, परस- राम, प्रभाकर आदि ने भी शृंगार रस की हिंदी रचना की है । स्थानाभाव तथा अश्लीलता अधिक होने के कारण उनकी कविता के नमूने नहीं दिए जा सकते ! -रत्नाकर - इनका मृत्यु- समय शाके १६४६ निश्चित है । इनका लिखा व्रज भागवत नामक ग्रंथ उपलब्ध हुआ है प—महोपति-ये महाराष्ट्र के नाभाजी के नाम से प्रसिद्ध । आप ही ने हिंदी ग्रंथ भक्तमाल का मराठी में भक्ति- विजय तथा भक्त-लीलामृत ग्रंथों में अनुवाद किया हैं, जिनमें बहुत से संत तथा उनकी कथाएँ बढ़ा दी गई है । आपकी यत्र तत्र हिंदी रचना भी पाई जाती है। ८-- मोरोपंत -ये महाराष्ट्र भाषा के केशवदासजी या महा- राष्ट्र के मिलटन कहे जा सकते हैं। आपकी रचना विशाल है। श्री सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई आदि का आपने खूब गुणगान किया है । हिंदी छंद हरिगीतिका का आपनी ने सब से पहले मराठी में उपयोग किया था । आप हिंदी के बड़े अच्छे ज्ञाता थे । कविता का नमूना निम्र है - पकड़ो लियो, इकालो, वे विश्वामित्र भाग जावेगा। आपकी मृत्यु शाके १७१६ में हुई ।