सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:कोशोत्सव-स्मारक-संग्रह.pdf/१५६

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

श्री नलिनीमोहन सान्याल, भाषा-तत्व-रत्न, एम० ए० ११३ हैं। परंतु भाव को रूप दान करना ही काव्य का एक मात्र काम नहीं; उसे जो रूप दिया जाता है, वह उसका स्थायी वस्तुगत रूप है या नहीं, इस बात की निश्चयता भी रहनी चाहिए। अपनी Greciat Uru वा ग्रोक मृत्पात्र नामक कविता में Keats ने क्षणिक सौंदर्य के भीतर एक मृत्युहीन अनंत स्थिति का अनुभव किया है और अपनी सौदर्य कल्पना को वस्तुगत रूप दिया है । सौंदर्य ही सत्य है और सत्य ही सौंदर्य है । सुंदर को सत्य बना देता है शिल्प | Realism वा वास्तव वाद हैं विश्व को वास्तव रूप में देखना और Idealism वा भाववाद है अंतर में अवस्थित संपूर्णता का बाह्य प्रकाश । भीतर कहूँ, तो जगमग लाजै; बाहर कहूँ, तो झूठा लो । यदि कहा जाय कि भीतर ही सत्य है तो समस्त जगत् लज्जित होता है; और यदि कहा जाय कि बाहर ही सत्य है, तो बात मिथ्या हा जाती है । अतएव भीतर एवं बाहर दोनों का सामंजस्य रखकर चलना आवश्यक है। आरी वर्गसौ ने Bodis और Tidealism Realism में से किसी को प्राधान्य नहीं दिया । वह कहते हैं कि ऊपर के संस्कार के स्थूल आवरण का मोचन कर उसकी चिर-नूतन अखंड सत्ताको उद्घाटित करने में हो शिल्प की सार्थकता है। वर्गसौ की यह व्याख्या बहुत सुंदर है । Į हम प्रत्येक वस्तु को नाना संबंधों में उलझा देते हैं । यदि हम उन्हें सुलझाकर उनके यथार्थ रूप देखने पाले तो वह कैसे आश्चर्य सुंदर प्रतिभात होते ! रवींद्रनाथ नं "उर्वशी" नामक कविता में सकल-संबंध विच्छिन्न कर नारी का सौंदर्य दिखाया है-- “ तुम न हो माता, न हो कन्या, न हो वधू, हे सुंदरी रूपसी" । सब वस्तुओं को एकांत, स्वतंत्र, अखंड करके देखना ही साहित्य का विशेषत्व है। साहित्य का चरम उद्देश्य यही है कि वह पूर्णता के आदर्श के द्वारा बाहर के सब श्रावरणों को छिन्न कर सब वस्तुओं की अंतरतम सत्ता को उद्घाटित कर दिखावे । १५