१६० प्राचीन आर्यावर्त और उसका प्रथम सम्राट हासिक काल के आटयों का इतिहास बनाया जाना अधिक भ्रमात्मक ही सिद्ध होगा। क्योकि के समय से पहिले का है । वर्णन नहीं मिलता, जैसा पीछे के अथर्वमंत्रों में उसका उल्लेख है । मेरा विश्राम हैं कि सुमरिया के जलप्लावन में 'पीर निपी इतीम्' का जो वर्णन है, वह एक कल्पना है, जो जलप्लावन से बच जाने के बाद वहाँ के निवासियों से गढ़ी था । जलपुत्र वा जल- शक्ति का नाम अग्वेद में अपान्नपात हैं । अवेस्ता में भी अपानपात् जल के देवता माने गए # } मंडल २-३५ का सूक्त उन्हीं की प्रार्थना में है। यहाँ वह जलपुत्र है। सुमेरियावालों ने जलप्रलय से बचने पर इन्हीं आर्य देवता की नाकर्ता का रूप दिया था। उनके पीर निमीतीम (Pir Nepishtim) भी जल के बीच में द्वीप के रहनेवाले देवता थे । जैसा से चलकर दिखलाया गया है. ये सुमरियावासी भी आदिम आर्य संतान ही थे; उससे इनका वैदिक देवता से परिचित होना असंभव नहीं । ऋग्वेद का समय उस जल प्रलय ऋग्वेद की ऋचाओं में जलप्रलय का ऋितु अपनी रक्षा का संबंध जो इन्होंने उक्त देवता से जोड़ लिया है, उससे प्रतीत होता है कि यह घटना ऋग्वेद से पीछे की है । अन्यथा, वेद में भी जलप्रलय का प्रसंग आता । सेमेटिक जाति के अभी तक यहां विश्वास था कि ऋग्वेद से पीछे के शतपथ ब्राह्मण में जिस जलप्रलय का वर्णन मिलता है वैबिलोनियावालों से उधार लिया हुआ है; किंतु विचार से यह एक अनावश्यक कल्पना है वह
मैकडानल के मैकाल के विचार की पुष्टि भूगर्भ शास्त्र के विद्वानां द्वारा भी होने लगी है । हिमालय की खोज करके लौटे हुए Dr. E. Trinkler का अभि-
- It is gumionlly regarded as borrowed iron a
Semitie satrer. Jat this scams to heal mmmces- sary bypothesis. P. 139, Vedic Mythology.