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पृष्ठ:कोशोत्सव-स्मारक-संग्रह.pdf/२२६

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श्री जयशंकर प्रसाद १८३ उसी प्राचीन संस्कृतिवानं देश के संदेशवाहकों के प्रचार का परिणाम हो* | प्राचीन शिनीर या सुमीर को वर्तमान सभ्यता का जनक मानने के लिये इस प्रकार बहुत से विद्वानों ने अनुरोध किया है, उसके मूल में यही सब कारण हैं। उनके मन से असुर का धर्म पारसियों ने वैबिलानियों से सीखा । (Darmistiter) – जैसे अवस्ता के अनुवादक ने तो यहाँ तक - कह डाला है - इस धर्म पर ग्रोक यहूदी और कितने ही धम्मों का प्रभाव है । और Proj Goldner का मत हैं कि ये गाथाएँ ही सब से पुरानी हैं जिन्हें कि 'जरथुस्त्र' का संदेश कहा जा सकता हैं । उनके संबंध में Darmistiter का मत है कि वे अधिक से अधिक ईसवी पूर्व पहली शताब्दी की हैं। । किंतु, पक्षपातपूर्ण संकीर्ण विचार में कितना सत्य है, नीचे का अवतर देखने से उसका पता लग जायगा, और यह जरदुश्त का धर्म वा संप्रदाय कितना प्राचीन हैं, यह भी आप जान सकेंगे। जैकन ब्रायंट नामी एक सुधी लेखक अपने 'ऐनालंसिल ऑफ ऐंसेंट माईबालाजी' में बहुत से प्रामाणिक लेखकों को उद्धृत करता है, जैसे- 'प्लिनी दि एल्डर' प्लुटार्क, प्लेटो, यूडाक्लस इत्यादि,

  • It may be, therefore, that the alt of Ashur

was influenced in its development by the doctrines of advanced teachers from Babylonia, and that Persian Mithraism was also the product of mission- ary efforts extended from that great and ancient cultural area. - ( P. 33s Myths of Babylonia). 4 They can hardly he older than the first century before our era, or even before Philo of Alexandria: for the neo-Platonic ideas and Leings are found in then just in the Phitoniau stage- (P. IXV, Vendidad.)