१-६४ प्राचीन आर्यावर्त और उसका प्रथम सम्राट इस लेख का सारांश यह है कि महावीर इंद्र की विजयों ने प्राचीन आर्यावर्त्त के 'त्रिसप्तक नद'- प्रदेश से असुर-उपासकों को हटा दिया। ईरान में वह असुर-उपासना, 'अहुरमज्द' - धर्म, फूला फला । यह ऐतिहासिक प्रसंग ७५०० ईसवी पूर्व से भी पहले का है। पिछले काल में भी मित्रायण, इक्ष्वाकु और क्षत्रिय जैसी भार्य धर्मानुयायो जातियाँ कभी कभी उन असुर देशों में भी अपनी विजयवैजयंती उड़ा आती थीं । 1 वह आर्य सभ्यता के इतिहास का प्रारंभिक अध्याय है, जब इंद्र ने आत्मवाद का प्रचार किया, जब असुरों पर विजय प्राप्त की और आर्यावर्त्त में साम्राज्य स्थापन किया । त्रिक प्रदेश की बसनेवाली भिन्न भिन्न आर्य संस्थाओं का, जो अपना स्वतंत्र शासन करती थीं और आपस में लड़ती थीं. सम्राट् बनकर इंद्र ने एक में व्यूहन किया और वैदिक काल की भरत नृत्सु पुरु श्रादि वीर - मंडलियाँ एक इंद्रध्वज की छाया में अपनी उन्नति करने लगी : संसार में इंद्र पहले सम्राट थे। असुरों ने उन प्राचीन घटनाओं के संस्मरण से पिछले काल में अपना पुराण चाहे विकृत रूप में बनाया हो परंतु है वह सत्य इतिहास, आय्यों का ही नहीं, अपितु मनुष्यता का; जब मनुष्य में आकाशी देवता पर से प्रास्था हटाकर आत्मसत्ता का विश्वास उत्पन्न हुआ !
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