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of the completion of your Shabda-sagar and I wish you all sorts of blessings."
अंत में हम परमात्मा से प्रार्थना करते हैं कि वह आपको चिरायु करे और आपके हिंदी-सेवा के विचारों को सफल करे जिससे हिंदी जगत् आपकी सेवाओं से अधिकाधिक लाभ प्राप्त कर सके।
| माघ कृष्ण १ | गौरीशंकर हीराचंद ओझा | |
| सं॰ १९८५ |