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पृष्ठ:कोशोत्सव-स्मारक-संग्रह.pdf/४९५

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४५२ कौटिलीय अर्थशास्त्र का रचनाकाल अब हम अन्य प्रयों से कुछ ऐसे प्रमाण देंगे, जिनसे यह स्पष्ट सिद्ध हो जायगा कि नंदों का नाश करनेवाले कौटिल्य ने ही अर्थ- शास्त्र बनाया है f कामंदक नीतिसार के लेखक ने नंद को नष्ट करनेवाले विष्णु- गुप्त के अर्थशास्त्र बनाने का उल्लेख स्पष्ट रूप से किया है । लिखता है --- यस्याभिचारवश्रेण वज्रज्वलनतेजसः । पपात मूलत: श्रीमान सुपर्वा नंदपर्वतः ॥ ४ ॥ एकाकी मंत्रशक्त्या यः शक्त्या शक्तिधरोपमः । आजहार नृचंद्राय चंद्रगुप्ताय मेदिनीम् ॥ ५ ॥ धोमानर्थशास्त्रमहोदधेः । नीतिशास्त्रामृतं समुध्रे नमस्तस्मै विष्णुगुप्ताय वेधसे ।। ६ ।। दर्शनात्तस्य सदृशो विद्यानां पारदृश्वनः । राजविद्याप्रियतया it संक्षिप्तग्रंथमर्थवत् ॥ ७ ॥ उपार्जने पालने च भूमेर्भूमीश्वरं प्रति । यत्किंचिदुपदेदयामो राजविद्याविदां मतम् ॥ ८ ॥ वह अर्थात् कामंदकनीति उसी विद्वान के मथ के आधार पर लिखी गई है, जिसने नंद को नष्ट कर चंद्रगुप्त को पृथ्वी का राजा बनाया और अर्थशास्त्ररूपी समुद्र में से नीतिशास्त्ररूपी अमृत को निकाला । उस विष्णुगुप्त को नमस्कार है । दण्डो ने भी अर्थशास्त्र के लेखक का नाम विष्णुगुप्त दिया है और उसका मौर्य चंद्रगुप्त के लिये बनाया जाना लिखा है । वह लिखता है-- अधीष्व तावद्दण्डनीतिम् । इयमिदानीमाचार्य विष्णुगुप्तेन मैाय्र्यार्थे षडभि: लोकसहस्रैः संक्षिप्ताः । सैवेयमधीत्य सम्यगनुष्ठीयमाना यथेोक्तकार्यक्षमेति । अर्थात् दण्डनीति का पढ़ो। आचार्य विष्णुगुप्त ने मौर्य के लिये इसे ६००० श्लोकों से संक्षिप्त किया है ।