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पृष्ठ:कोशोत्सव-स्मारक-संग्रह.pdf/४९६

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श्री कृष्णचंद्र विद्यालंकार ४५.३ इसी तरह वाय* पंचतंत्रकार और रघुवंश के टीकाकार मल्लिनाथ ने कौटिल्य या चाणक्य के अर्थशास्त्र का निर्देश किया है । नंदिसूत्र नामक जैस ग्रंथ में भी कौटिलीय अर्थशास्त्र का उल्लेख है । सोमदेव सूरि ने भी, जो यशोधर के समय विद्यमान था, चाणक्य के नंदनाश का वर्णन किया है। उसका नीतिवाक्यामृत अर्थशास्त्र के आधार पर लिखा गया है +1 इस प्रकार अंत:साक्षी और बाह्यसाक्षी दानों से सिद्ध हो गया कि अर्थशास्त्र का कर्ता चंद्रगुप्तकालीन कौटिल्य है । प्रोफेसर मैक्डानल प्रभृति कतिपय विद्वानों का विचार है कि कौटिलीय अर्थशास्त्र किसी एक कर्ता की कृति नहीं है । चहुत

  • किंवा तेषां मतं येषामतिनृशंसायोपदेशे निवृण कौटिल्य-

शास्त्रं प्रमाणम् । अभिचारकियाकुरेकप्रकृतयः पुरोधसेो गुरवः । पराति- संधानपरा मंत्रिण उपदेष्टारः । नरपतिसहस्रोज्झितायां लक्ष्म्यामावतिः । मरणात्मकेषु शास्त्र वभियोगः । सहजप्रेमाई हृदया भ्रातर उच्छेद्याः । (कादंबरी) 1 ततो धर्मशास्त्राणि मन्वादीनि । अर्थशास्त्राणि चाणक्यादीनि । काम- शास्त्राणि वात्स्यायनादीनि । (पंचतंत्र ) 1 क-त्र कौटिल्यः- भूतपूर्वमभूतपूर्व वा जनपदं परदेशप्रवाहेण स्वदेशाभिष्यन्दवमनेन वा निवेशयेत् । (रघु० १५ -- २१ ) ख- व कौटिल्य : क्षीणाः प्रकृतयो लोभं लुब्धा यान्ति विरागताम् । विरक्ता यात्यमित्रं वा भर्तारं नन्ति वा स्वयम् ॥ ( रघु० १७ - १५ ) इसी तरह १७ व सर्ग के ४६, ५६, ७६ और तथा १८वें सर्व के ५० श्लोकों की टीका में मल्लिनाथ ने अर्थशास्त्र से उद्धत कर कौटिल्य का मत दिया है । ८ $ मए श्रमचपुते चाणक्के चैव यूटबडेय (१३३) और "भार रामायणं भीमासुरकं कोडिल्लियम्" (३६१ सू० ) में क्रमश: चाणक्य और कौटिलीय अर्थशास्त्र का उल्लेख है । 1 श्रयते हि किल चाणक्यस्तीक्ष्णदूतप्रयेोगेीकं नंद जघानेति । ( पृ० ५२ ) + परस्पर समानता के उदाहरणों के लिये देखो प्राणनाथ विद्यालंकार द्वारा श्रनुवादित कौटिल्य अर्थशास्त्र की प्रस्तावना । ( पृ० १५ )