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समर्प अपने जन्मदाता और प्राण श्रीयुक्त बाबू श्यामसुंदरदासजी बी० ए० को जिनके परिश्रम, उद्योग और बुद्धि-बल से तथा जिनके संपादन में हिंदी भाषा का सबसे बड़ा कोश हिंदी शब्दसागर प्रस्तुत हुआ है उनके सम्मानार्थ तथा कीर्ति - रक्षार्थ काशी-नागरीप्रचारिणी सभा द्वारा निवेदित माघ शुक्ल ५ संवत् १६८८५