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पृष्ठ:कोशोत्सव-स्मारक-संग्रह.pdf/८५

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४२ पृथ्वीराज रासो का निर्माण- -काल विग्रहराज का दिल्ली और हाँसो को लेना लिखा है * | तबकाते नासिरी में शहाबुद्दीन गोरी के साथ की पहली लड़ाई में दिल्ली के राजा गोविंदराज का पृथ्वीराज के साथ होना और उसी ( गोविंद- राज ) के भाले से सुलतान का घायल होकर लौटना तथा दूसरी लड़ाई में, जिसमें पृथ्वीराज की हार हुई, उस ( गोविंदराज ) का मारा जाना लिखा है। । इससे निश्चित है कि पृथ्वीराज ( तीसरे ) के समय दिल्ली अजमेर के उक्त सामंत के अधिकार में थी । पृथ्वीराज की माता का नाम भी कमला नहीं, किंतु कर्पूर देवी था और वह दिल्ली के राजा अनंगपाल की पुत्री नहीं, किंतु त्रिपुरी ( चेदि अर्थात् जबलपुर के आसपास के प्रदेश की राजधानी ) के हैहय ( कलचुरि ) वंशी राजा तेजल ( अचलराज ) की पुत्री थी । यदि पृथ्वोराजरासो पृथ्वीराज के समय में लिखा जाता, तो उस में यह घटना ऐसी कल्पित न लिखी जाती ! पंद्रहवीं शताब्दी का

  • प्रतोत्यांच वलभ्यां च येन विश्रामितं यशः [ 1 ]

दिल्लिका ग्रहणश्रांतमाशिकालाभलंभितः ( नं ) ||२२|| बिजोलियां का लेख ( छाप पर से ) | तबकाते नासिरी का अंगरेजी अनुवाद (मेजर राव का किया हुआ ): पृ० ४५६-६६ । f. इति साहससाहचर्य चयस्समयज्ञः प्रतिपादि ]तप्रभावाम् । तनयां स सपादलक्षपुण्यैरुपयेमे त्रिपुरीपुर [ न्द रम्य ॥ [ १६ ] ॥ पृथ्वी पवित्रतां नेतुं राजशब्द कृतार्थताम् । पृथ्वीराज विजय; सर्ग ७ । चतुर्वर्णधनं नाम पृथ्वीराज इति व्यधात् ॥ [३०] ॥ मुक्तवति सुवाश गरुपमौक्तिकं । देवं सोमेश्वरं दृष्ट राजश्रीरुदकण्टत ॥ [ १७ ] " श्रात्मजायामिव यशः प्रतापास्यामिवान्वितः । सपादलक्षमानिन्ये महामात्यैमहीपतिः ॥ [ ८ ] ॥ कर्पूर देव्यथादाय दानभोगवितात्मज । विवेशाजयराजस्य "संपन्मूर्तिमती पुरीम् ॥ [ १६ | वही; सर्ग ८ । वही; सर्ग ८ |