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पृष्ठ:कोशोत्सव-स्मारक-संग्रह.pdf/९५

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५.२ माना जा सकता पृथ्वीराज रासो का निर्माण-काल समय के शिलालेख वि० १२१०, १२११ और १२२० के मिले हैं, * जिनसे वि० सं० ८२१ अर्थात् पंडाजी के अनंद संवत् के अनुसार वि० सं० २३१ में उसका राज्याभिषेक होना किसी प्रकार नहीं इसी तरह पंडनाजी के माने हुए संवत् तक पाटन में सोलंकियों का अधिकार भी नहीं हुआ था । उस समय तो क्षेमराज चावड़ा गुजरात का राजा था । वि० सं० २०१७ में सोलंकी मूलराज ने अपने मामा सामंतसिंह को मारकर पाटन का राज्य लिया और चावड़ा वंश की समाप्ति की । का सोलंकी राजा गुजरात में कोई हुआ ही नहीं । बालुकाराय नाम विग्रहराज ( वीसलदेव ) नाम के चार चौहान राजा हुए, जिनमें से तीन तो अजमेर बसने से पूर्व हुए थे। दूसरे विग्रहराज ने, जिसके समय की वि० सं० १०३० की हर्षनाथ के मंदिर की प्रशस्ति है, मूलराज सोलंकी पर, जिसने १०१७ से १०५२ तक राज्य किया था। शाकंभरी (साँभर) से चढ़ाई की थी। इस चढ़ाई का वर्णन पृथ्वीराज विजय, हम्मीर महाकाव्य और प्रबंब चिंतामणि में मिलता है, परंतु पृथ्वीराजरासों के कर्त्ता को तो केवल एक वीसल- देव का ज्ञान था, जिसने वीसलसर बनाया था। वह वस्तुतः चतुर्थ वीसलदेव था । बीसलदेव (दूसरे ) की सालंकी राजा मूलराज पर संवत् १२६० मार्ग शुद्धि चादित्यदिन श्रवणनक्षत्र मकरस्थे चन्द्रे यो वावरणे हरकेलि-नाटकं समाप्त | मंगल महाश्रीः ॥ कृतिरिश्र महाराजाधिराजपरमेश्वरश्री विग्रहराजदेवस्य. ( शिलाओं पर खुदा हुआ हरकेलि नाटक, राजपूताना म्यूजियम, श्रज- मेर में सुरक्षित ) । ॐ ॥ संवत् १२११ श्री: ( श्री ) परमपासु ( शु ) पताचार्येन ( ) विश्वे - [[ ]ज्ञेन श्रीवीसलदेवराज्ये श्रीसिद्धश्वरप्रासादे मण्डप भूपितं ] ॥ ( लोहारी के मंदिर का लेख, अप्रकाशित ) । ॐ संवत् १२२० वैशाख शुति १५ शाकंभरी भूपति श्रीमदन्नलदेवात्मज श्रीमदीसलदेवस्य ॥ इंडियन एटिक्वेरी; जिल्द १६, पृ० २१८ । f राजपूताने का इतिहास, जिल्द १, पृष्ठ २१४ – ११ ।