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पृष्ठ:खग्रास.djvu/२४८

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खग्रास

"तो इसका यही तो अभिप्राय हुआ कि उद्जन बम मे जो प्रतिक्रिया होती है, उस शक्ति का उपयोग मनुष्य के कल्याणकारी कार्यों में किया जा सकता है।"

"बेशक," डाक्टर भामा ने ज्यो ही प्रो॰ कुरशातोव को अत्यन्त गम्भीर होते देखा तो कुछ शकित चित्त से कहा—

"पाप अवश्य ही इस समय किसी रहस्य का उद्घाटन करना चाहते है, प्रोफेसर कुरशातोव।"

"आपका अनुमान ठीक है डाक्टर भामा। आप हमारे मित्र हैं। और उस भारत का आप प्रतिनिधित्व कर रहे है जहाँ गाँवी और जवाहरलाल जैसी इस युग की मनुष्य को सबसे अधिक प्यार करने वाली हस्तियाँ उत्पन्न हुई है। मै आपके समक्ष एक अत्यन्त गुप्त रहस्य प्रकट करना चाहता हूँ और आशा करता हूँ, आप यह रहस्य गुप्त ही रखेंगे।"

"निस्सन्देह प्रो॰ कुरशातोव, आप मुझ पर विश्वास कर सकते हैं। परन्तु यदि वह बात अत्यन्त गोपनीय है तो मैं उसके जानने का आग्रह नही करूँगा।"

इस पर प्रो॰ कुरशातोव गद्गद् हो उठे। उन्होने कहा, "नही, नही, मेरे मित्र, मै आपको यह बताना चाहता हूँ कि हमने अपनी प्रयोगशाला मे दस लाख डिग्री सेटीग्रेड के बराबर ताप उत्पन्न कर लिया है।"

डाक्टर भामा यह सुनकर उछल पडे, उन्होने कहा—"इसकी तो पृथ्वी पर कल्पना भी कठिन है। तब तो यह भी सम्भव है कि अब परमाणुओ के द्रवण से असीम शक्ति उत्पन्न की जा सकेगी जिस पर मनुष्य नियन्त्रण कर सकेगा।"

"निस्सदेह डा॰ भामा, मै इस नियन्त्रण को अत्यन्त महत्व देता हूँ। आप जानते ही है कि उद्जन बम जब फटता है तब वह नियन्त्रित नही रहता।"

"हाँ, हाँ, उद्जन बम के विस्फोट से लाखो टन टी॰ एन॰ टी॰ के बराबर शक्ति निकलती है। परन्तु प्रोफेसर, अब मैं भी आपके सामने