पृष्ठ:गल्प समुच्चय.djvu/२१३

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कमलावती


कहना पड़ा—बन्दा आपकी आज्ञा का पालन करेगा, आप निश्चिन्त रहें।

सुलतान और कुछ न बोला, वहाँ से शीघ्र चला गया।

शाह जमाल के हृदयाकाश में आशा का जो उज्ज्वल आलोक प्रकट हुआ था, वह अन्धकारमय निराशा में परिणत हो गया। वह सुख का स्वप्न चला गया।

गुर्ज्जर-विजय करने का पहले जैसा उत्साह था, वैसा अब न रहा। शाह विषण्ण मुख से बोला—रुस्तम युद्ध के लिए प्रस्तुत हो। खुदा को मंजूर है वही होगा।

(७)

भैरव हाँफता-हाँफता कमलावती के कमरे के पास आकर विकृत स्वर से बोला—मा, मा!

कमलावती ने बाहर आकर कहा—कौन है? भैरव! क्या बात है?

भैरव ने कहा-मा, सर्वनाश उपस्थित है!

कमलावती ने डरकर पूछा—क्यों, क्या हुआ?

भैरव-मुसलमानों की सेना गुर्जर के समीप आ गई है।

कमलावती—कितनी सेना?

भैरव—प्रायः बीस हजार।

कमला—बी-स-ह-जा-र—!!!

भैरव-हाँ, मा, इससे अधिक होगी—कम नहीं।

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