पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/१०५

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गुप्त-निबन्धावली चरित-चर्चा बाद मौलवी रज्जब अलोकी बदौलत उन्हें फिर पंजाबमें आना नसीब हुआ। रजब अली जगरांव जिला लुधियानाके रहनेवाले थे। किसी ज़मानेमें पंजाबके छोटे लाटसाहवके मीरमुंशी थे। अय्याम६४ गदर में अंग्रेज़ोंके साथ जगरांवसे देहली आये थे। अंग्रेज़ी लशकरमें रहते थे। कप्तान हडसन उनके अफसर थे। उर्दू फारसीका सब काम मौलवी रज्जब अली कमान हडसनको मातहतीमें अंजाम देते थे। सरकारी खैर ख्वाह देहलीसे दुसरे लशकरोंमें जो खबर भेजते थे, वह सब मौलवी रजब अलीके हाथोंमें जाती थीं। अंग्रेज़ोंमें उनका बड़ा रसूख था। वह आज़ादके हममजहब थे। उन्होंने बंदोबस्त करके हैदराबादसे बुलाया और पंडित मनफूलसे जो उनके बाद मीर मुंशो हुए आज़ादको सिफारिश को। पंडित साहबने सरिश्ता तालीम पंजाबके डाइरेक्टर मेजर फिलर साहबसे कहकर उनके दफ्तर में मुहम्मद हुसेनको पन्दरह रूपया माहवारको एक मुहररी दिला दी। ____ रायबहादुर मास्टर प्यारेलाल साहब रईस देहली इस ज़माने में देहली नार्मलस्कूलके हेडमास्टर थे, बादमें वह पंजाबके स्कूलोंके इन्सपेक्टर हुए और माहवार सात सौ रुपये तनख्वाह पाई। अब आप पंशनयाब होकर बुढ़ापेके दिन बसर करते हैं। मगर इस पीरानासालीमें भी जवानीका जोश रखते हैं । मुल्की और क़ौमी भलाईके कामोंमें बहुत- कुछ मेहनत बर्दाश्त करते हैं। आप 'आज़ाद'के बड़े तरफ़दार थे। आप ही इनकी तरक्कोका बायम हुए। सरिश्ता तालीमके डाईरेक्टर फिलर साहब यूनिवर्सिटीके लिये जो सवालात ५ तैयार करते थे वह मास्टर साहबको दिखा लेते थे। मास्टर साहबको इस्लाह३६ पर वह बड़ा भरोसा रखते थे। और उनको इलमीयत६७ के मोतरफ६८ थे। लाहौर में एक दिन मास्टर ६४-गदरके दिनों । ५-प्रश्न। ६६-सशोधन ।६७-विद्वता । ६८-प्रशसक । [ ८८ ]