पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/२०२

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श्रीमान्का स्वागत सादगीसे हाथ मिलाकर चल दिये थे। यह कई एक कसर ऐसी हैं, जिनके मिटानेको फिर दरबार हो सकता है। फिर हाथियोंका जुलूस निकल सकता है। ___ इन लोगोंके विचारमें कलाम नहीं । पर समय कम है, काम बहुत होंगे। इसके सिवा कई राजा महाराजा पहले दरबारहीमें खर्चसे इतने दब चुके हैं कि श्रीमान लार्ड कर्जनके बाद यदि दो वैसराय और आव और पांच पांचकी जगह सात सात माल तक शासन कर, तब तक भी उनका सिर उठाना कठिन है। इससे दरबार या हाथियोंके जुलूमकी फिर आशा रखना व्यर्थ है । पर सुना है कि अबके विद्याका उद्धार श्रीमान जरूर करंगे। उपकारका बदला देना महत् पुरुषोंका काम है। विद्याने आपको धनी किया है, इससे आप विद्याको धनी किया चाहते हैं । इसीसे कङ्गालोंसे छीनकर आप धनियोंको विद्या देना चाहते हैं । इससे विद्याका वह कष्ट मिट जावेगा जो उसे कङ्गालको धनी बनाने में होता है। नीव पड चुकी है, नमूना कायम होनेमें देर नहीं । अब तक गरीब पढ़ते थे, इससे धनियोंकी निन्दा होती थी कि वह पढ़ते नहीं। अब गरीब न पढ़ सकगे, इससे धनी पढ़ न पढ़े उनकी निन्दा न होगी। इस तरह लार्ड कर्जनकी कृपा उन्हें बेपढ़ भी शिक्षित कर देगी। और कई काम हैं, कई कमीशनोंके कामका फैसिला करना है, कितनीही मिशनोंकी कारवाईका नतीजा देखना है। काबुल है, काश्मीर है, काबुलमें रेल चल सकती है, काश्मीरमें अंग्रजी बस्ती बस सकती है। चायके प्रचारकी भांति मोटरगाड़ीके प्रचराकी इस देशमें बहुत जरूरत है । बङ्गदेशका पाटींशन भी एक बहुत जरूरी काम है । सबसे जरूरी काम विकोरिया मिमोरियल हाल है। सन् १८५८ ई० की घोषणा अब भारतवासियोंको अधिक स्मरण रखनेकी जरूरत न पड़ेगी। श्रीमान् स्मृतिमन्दिर बनवाकर स्वगीया महारानी विक्टोरियाका ऐसा स्मारक [ १८५ ]