पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/२०६

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वैसरायका कर्तव्य कर्तव्यभूमिको हमलोग कर्मभूमि कहते हैं। आप कर्तव्य-पालन करने आये हैं और हम कर्मोका भोग भोगने। आपके कर्तव्य-पालनकी अवधि है, हमारे कर्मभोगकी अवधि नहीं। आप कर्तव्य-पालन करके कुछ दिन पीछे चले जावंगे। हमें कर्मके भोग भोगते-भोगते यहीं समाप्त होना होगा और न जाने फिर भी कबतक वह भोग समाप्त होगा । जब थोड़े दिनके लिये आपका इस भूमिसे स्नेह है तो हमलोगोंका कितना भारी स्नेह होना चाहिये, यह अनुमान कीजिये। क्योंकि हमारा इस भूमिसे जीने-मरनेका साथ है। ___माई लार्ड ! यद्यपि आपको इस बातका बड़ा अभिमान है कि अंग्रेजों- में आपकी भांति भारतवर्षके विषयमें शासननीति समझनेवाला और शासन करनेवाला नहीं है। यह बात विलायतमें भी आपने कई बार हेर-फर लगाकर कहो और इस बार बम्बईमें उतरतेही फिर कही। आप इस देशमें रहकर ७२ महीने तक जिन बातोंकी नीव डालते रहे, अब उन्हें २४ मास या उससे कममें पूरा कर जाना चाहते हैं। सरहदों पर फौलादी दीवार बनादेना चाहते हैं। जिससे इस देशकी भूमिको कोई बाहरी शत्रु उठाकर अपने घरमें न लेजावे ! अथवा जो शान्ति आपके कथनानुसार धीरे-धीरे यहाँ सञ्चित हुई है, उसे इतना पक्का कर देना चाहते हैं कि आपके बाद जो वैसराय आपके राजसिंहासनपर बैठ उसे शौकीनी और खेल-तमाशेके सिवा दिनमें और नाच, बाल या निद्राके सिवा रातको कुछ करना न पड़ेगा ! पर सच जानिये कि आपने इस देशको कुछ नहीं समझा, खाली समझनेकी शेखीमें रह और आशा नहीं कि इन अगले कई महीनोंमें भी कुछ समझ। किन्तु इस देशने आपको खूब समझ लिया और अधिक समझनेकी जरूरत नहीं रही। यद्यपि आप कहते हैं, कि यह कहानीका देश नहीं कर्तव्यका देश है, तथापि यहाँकी प्रजाने समझ लिया है कि आपका कर्तव्यही कहानी [ १८९ ]