पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/२१४

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पीछे मत फेंकिये जावगी, युग बीत जावंगे। समयके महासमुद्रमें मनुष्यकी आयु एक छोटी- सी बूंदकी भी बराबरी नहीं कर सकती। आपमें शक्ति नहीं है कि पिछले छः वर्षोंको लौटा सकं या उनमें जो कुछ हुआ है उसे अन्यथा कर सके। दो साल आपके हाथमें अवश्य हैं। इनमें जो चाहें कर सकते हैं। चाहें तो इस देशकी ३० करोड़ प्रजाको अपनी अनुरक्त बना सकते हैं और इस देशके इतिहासमें अच्छे वैसरायोंमें अपना नाम छोड़ जासकते हैं। नहीं तो यह समय भी बीत जावेगा और फिर आपका करने धरनेका अधिकारही कुछ न रहेगा ! विक्रम, अशोक, अकबरके यह भूमि साथ नहीं गई। औरङ्गजेब, अलाउद्दीन इसे मुट्ठीमें दबा कर नहीं रख सके। महमूद, तैमूर और नादिर, इसे लूटके मालके साथ ऊंटों और हाथियोंपर लाद कर न ले जासके। आगे भी यह किसीके साथ न जावेगी, चाहे कोई कितनीही मजबूती क्यों न करे। इस समय भगवानने इसे एक औरही जातिके हाथमें अर्पण किया है, जिसकी बुद्धि, विद्या और प्रतापका संसार भरमें डका बज रहा है। माई लार्ड । उसी जातिकी ओरसे आप इस देशकी ३० करोड़ प्रजाके शासक हैं। ___ अब यह विचारना आपहीके जिम्मे है कि इस देशकी प्रजाके साथ आपका क्या कर्तव्य है। हजार सालसे यह प्रजा गिरी दशामें है। क्या आप चाहते हैं कि यह और भी सौपचास साल गिरती चली जावे ? इसके गिरानेमें बड़ेसे बड़ा इतनाही लाभ है कि कुछ सङ्कीर्णहृदय शास- कोंकी यथेच्छाचारिता कुछ दिन और चल सकती है। किन्तु इसके उठाने और सम्हालनेमें जो लाभ हैं, उनकी तुलना नहीं हो सकती है। इति- हासमें सदा नाम रहेगा कि अंग्रेजोंने एक गिरी जातिके तीस करोड़ आदमियोंको उठाया था। माई लार्ड। दोनोंमें जो बात पसन्द हो, वह कर सकते हैं । कहिये क्या पसन्द है ? पीछे हटाना या आगे बढ़ाना ? । १९७ ]