पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/२१७

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गुप्त-निबन्धावली चिट्टे और खत उसके प्रथम फलस्वरूप कलकत्तेमें पदार्पण करतेही आपने यहाँके म्यूनिसिपल कारपोरेशनकी स्वाधीनताकी समाप्ति की । जब वह प्रभाव कुछ और बढ़ा तो अकाल पीड़ितोंकी सहायता करते समय आपकी समझमें आने लगा कि इस देशके कितनही अभागे सचमुच अभागे नहीं, वरंच अच्छी मजदूरीके लालचसे जबरदस्ती अकालपीड़ितोंमें मिलकर दयालु सरकारको हैरान करते हैं ! इससे मजदूरी कड़ी की गई। इसी प्रकार जब प्रभाव तेज हुआ तो आपने अकालकी तरफसे आँखोंपर पट्टी बांधकर दिल्ली-दरबार किया। ___ अन्तको गत वर्ष आपने यह भी साफ कह दिया कि बहुतसे पद ऐसे हैं जिनको पैदाइशी तौरसे अंग्रेजही पानेके योग्य हैं। भारत- वासियोंको सरकार जो देती है, वह भी उनकी हैसियतसे बढ़कर है। तब इस देशके लोगोंने समझ लिया था कि अब श्रीमानपर यहाँके जलवायुका पूरा सिक्का जम गया। उसी समय आपको स्वदेशदर्शनकी लालसा हुई। लोग समझे चलो अच्छा हुआ, जो हो चुका, वह हो चुका, आगेको तासीरकी अधिक उन्नतिसे पीछा छूटा। किन्तु आप कुछ न समझे। कोरियामें जब श्रीमान्की आयु अचानक सात साल बढ़कर चालीस होगई, उस समय भो श्रीमानकी समझमें आ गया था कि वहाँ- की सुन्दर आवहवाके प्रतापसे आप चालीस सालके होनेपर भी बत्तीस तंतीसके दिखाई देते हैं। पर इस देशकी आबहवाकी तासीर आपके कुछ समझमें न आई। वह विलायतमें भी श्रीमान्के साथ लगी गई और जबतक वहां रहे, अपना जोर दिखाती रही। यहां तक कि फिर आपको एक बार इस देश में उठा लाई, किसी विघ्न वाधाकी परवा न की । ___ माई लार्ड ! इस देशका नमक यहाँके जलवायुका साथ देता है, क्योंकि उसी जलवायुसे उसका जन्म है। उसकी तासीर भी साथ साथ होती रही। वह पहले विचार-बुद्धि खोता है। पीछे दया और [ २०० ]