पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/२२६

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एक दुराशा यदि माई लार्ड एक बार इन लोगोंको देख पाते तो पूछनेको जगह हो जाती कि वह लोग भी बृटिश राज्यके सि टिजन हैं वा नहीं ? यदि हैं तो कृपा पूर्वक पता लगाइये कि उनके रहनेके स्थान कहां हैं और बृटिश राज्यसे उनका क्या नाता है ? क्या कहकर वह अपने राजा और उसके प्रतिनिधिको सम्वोधन कर ? किन शब्दोंमें बृटिश राज्यको असीस दं ? क्या यों कहें कि जिस बृटिश राज्यमें हम अपनी जन्मभूमिमें एक उंगल भूमिके अधिकारी नहीं, जिसमें हमारे शरीरको फटे चिथड़े भी नहीं जुड़े और न कभी पापी पेटको पूरा अन्न मिला, उस राज्यकी जय हो ! उसका राजप्रतिनिधि हाथियोंका जुलूस निकालकर सबसे बड़े हाथीपर बँवर छत्र लगा कर निकले और स्वदेशमें जाकर प्रजाके सुखी होनेका डङ्का बजावे ? इस देशमें करोड़ों प्रजा ऐसो है, जिसके लाग जब संध्या सवेरे किसो स्थान पर एकत्र होते हैं तो महाराज विक्रमको चर्चा करते हैं और उन राजा महाराजोंकी गुणावली वर्णन करते हैं, जो प्रजाका दुःख मिटाने और उनके अभावोंका पता लगानेके लिये रातोंको वेश बदलकर निकला करते थे। अकबरके प्रजापालनको और बीरबलके लोकरञ्जनकी कहानियां कहकर वह जी बहलाते हैं और समझते हैं कि न्याय और सुखका समय बीत गया। अब वह राजा संसारमें उत्पन्न नहीं होते, जो प्रजाके सुख दुःखकी बात उनके घरोंमें आकर पूछ जाते थे। महारानी विक्टोरियाको वह अवश्य जानते हैं कि वह महारानी थी और अब उनके पुत्र उनकी जगह राजा और इस देशके प्रभु हुए हैं। उनको इस बातकी खबर तक भी नहीं कि उनके प्रभुके कोई प्रतिनिधि होते हैं और वही इस देशके शासन- के मालिक होते हैं तथा कभी-कभी इस देशकी तीस करोड़ प्रजाका शासन करनेका घमण्ड भी करते हैं। अथवा मन चाहे तो इस देशके साथ बिना कोई अच्छा बरताव किये भी यहांके लोगोंको झूठा, मक्कार आदि [ २०९