पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/२७३

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गुप्त-निबन्धावली चिठे और खत 11 लालजीका ‘प्रेमसागर" बन गया था। सरकारी दफ्तर सन् १८३५ ई० में उर्दू होने आरम्भ हुए थे। सन् १८३६ ईस्वीमें अखबारोंको स्वाधीनता मिली। ___ सन् १८३३ ई०में उर्दूका पहला अखबार दिल्ली में जारी हुआ। उसका नाम मालूम नहीं, क्या था । लाहोरके गवर्नमेण्ट कालिजके अरबी-भापाके प्रोफेसर मौलवी मुहम्मद हुसैन आजाद दिल्ली-निवासीने अपनी "आबेहयात' नामकी पोथीमें केवल इतना लिखा है कि उर्दूका पहला अखबार दिल्लीसे मेरे पिताके कलमसे निकला । जान पड़ता है कि उक्त अखबार बहुत दिन चला नहीं। इसीसे प्रोफेसर आजादने उसका कुछ विशेष उल्लेख नहीं किया । वह अखबार अबतक जारी रहता, तो ६७ सालका होता । उसके बाद कोई और उद्दे अखबार निकला या नहीं, कुछ पता नहीं। कोहेनूर इसके कोई १४ साल पीछे सन १८५० ई०में लाहोरसे “कोहेनूर" नामका एक उर्दू साप्ताहिक पत्र निकला । उसके मालिक एक हिन्दुस्थानी भटनागर कायस्थ मुंशी हरसुखराय साहब थे। एक समय वह बड़ा नामी और बड़ी इज्जतका कागज था। आज भी जीवित है, पर गुमनामीके गढ़ेमें पड़ा हुआ है। एक मित्रको पत्र लिखनेसे जान पड़ा कि अभी कोहेनूरका अस्तित्व लोप नहीं हुआ है। नाम लेनेके लिये वह उर्दूका पुराना और प्रतिष्ठित अखबार नाम धारण किये है। कोहेनूरने जारी होनेके थोड़ेही दिन पोछे अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त की। पञ्जाबहीमें क्या सारे भारतमें उर्दुका वह अकेला पत्र था, इससे उसकी बड़ी भारी इज्जत हुई। उस समय हिन्दुस्थानी रियासतोंकी भी ऐसी दशा न थी, जैसी आजकल है । उस समय कितनीही रियासतोंमें अच्छे अच्छे शासक और दीवान अहलकार थे। रजवाड़ोंमें सर्वत्र कोहेनूरकी [ २५६ ]