पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/२९४

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उर्द-अखबार अच्छी उर्दुका पत्र निकलता है। पर दोष यही है कि जहां बीस माल पहले था, वहीं अब है। उद्देश्य हम ऊपर कह आये हैं कि उर्दू अग्वबार बहुत कालतक उद्देश्यहीन दशामें चलते रहे। अबतक जिन अग्वबारोंका वर्णन कर चुके हैं, प्रायः वही हैं जिनके ममयमें अखबार लिग्वनेका कोई उद्देश्य स्थिर नहीं हुआ था। आगे उन अखबारोंकी बात कहते हैं जिन्होंने उर्दू अखबार नवीसी- का उद्देश्य स्थिर किया। हिन्दुस्तानी। लग्वनऊका “हिन्दुस्तानी" उद्दे अग्वबारों में सबसे पहला अग्वबार है, जिसने उर्दू अखबारोंका उद्देश्य स्थिर किया। इस पत्रने दिखाया कि उद्दे पत्रोंको किस पथपर चलना चाहिये और उन्हें क्या लिखना चाहिये । जिस प्रकार कलकत्त में देशी अग्वबारोंकी एक पालिसी स्थिर करनेवाला पत्र “अमृतबाजार" है और “हिन्दू पेटरियट' उससे पुराना होनेपर भी वह इज्जत न पा सका, वैसे ही उद्दे अखबारों में “हिन्दुस्तानी" है जिसने उर्दू अख- बारोंको पालिसी सिखाई। जनवरी सन १६०४ ई० से हिन्दुस्तानीको इक्कीसवां वर्ष लगता है। बीस साल उसे निकलते हो गये। आरम्भमें वह उर्दू और हिन्दी दोनोंमें निकला था। लीथोहीमें उर्दू हिन्दी दोनोंका काम चलता था। नया होनेसे अखबारी दुनियाकी बहुत बात न जानता था। अपने विज्ञापनमें उसने लिखा था-"हिन्दुस्तानी हर सप्ताह तीन सौ खबर छापता है।” तब यह सचमुच छोटी-छोटी खबरोंका कागज था। पर यह दशा उसकी बहुत दिन न रही। कुछ दिन पीछ हिन्दीको उसने बिदा किया और खाली उर्दूमें निकलने लगा। शायद हिन्दी पाठकोंसे उसे कुछ सहायता न मिली । तबतक हिन्दीकी दशा भी अच्छी [ २७७ ]