पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/३०६

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उर्दू-अखबार हमलोग दृढ़ताके साथ अच्छे काम किये चले जायंगे तो कीर्ति करनेवाले बहुत मिलेंगे। हमें अपने मुंहसे अपनी तारीफ स्वयं न करनी पड़ेगी। मासिक पत्र उर्दू के दैनिक और साप्ताहिक-पत्रोंके विषयमें पहले जो जरूरी था, वह कहा जा चुका । आज कुछ उद् मासिकपत्रोंके विपयमें कहना चाहते हैं। मासिक-पत्रोंकी नीव उद्धृ में कबसे पड़ी इसका हमें ठीक खयाल नहीं है। पर जहाँतक जानते हैं उर्दू का सबसे उत्तम मासिकपत्र मर सैयद अहमदग्यांका "तहजीबुल अग्वलाक" था जो सन १२८७ हिजरीसे १२६३ हिजरी तक सात साल निकलकर बन्द हुआ। उसे बन्द हुए इस समय २६ सालसे अधिक होगये । यह अंग्रेजीके नामी मेगजीनोंके ढंगका पत्र था। इसके लेखक भो वह लोग थे, जिनकी चेपासे मुसलमानोंमें अंग्रेजी शिक्षा फैली और अलीगढ़का मुसलमानी कालिज बना। नवाब मुहसिनुल- मुल्क, सैयद मेहदोअली, स्वयं अनरेबल डाकर सर सैयद अहमदग्वां, आजमयार जङ्ग, मौलवी चिरागअली, मौलवी मुशताक हुसैन, इन्तजार- जङ्ग, मौलवी अलताफ हुसैन हाली, सैयद महमूद, मौलवी जकाउल्लह आदि आदि विद्वानोंके लेव इसमें निकलते थे। मुसलमानियतकी झोंक ही इस पत्रमें अधिक थो। किन्तु बहुत कामके लेब हैं, पढ़नेके योग्य हैं। एक दो नहीं, सैकड़ों नई वातं अब भी उनके पढ़नेसे मालूम होती हैं । उक्त मासिकपत्रके लेव अभी तक मरे नहीं हैं, क्योंकि वह चार पुस्तकोंमें अलग-अलग छपकर अब भी बिकते हैं। जिस समयमें उक्त मासिकपत्र निकला था, उस समय मुसलमानोंमें विद्याका इतना प्रचार नहीं हुआ था । तथापि पत्र उर्दू था और मुसल- मान बहुत दिनसे उर्दू सीखे हुए थे। इससे वह बहुत लोगोंमें पढ़ा गया। किन्तु अधिक बड़े आदमियोंहीमें । सर्वसाधारण तक कम पहुंचा । [ २८९ ]