पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/३२१

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गुप्त-निबन्धावली संवाद-पत्रोंका इतिहास हैं । अकल उनके पास तक नहीं फटकी। मुसलमान बहुत अच्छे हैं उनका मजहब बहुत अच्छा है, उनकी मजहबी किताबें बहुत अच्छी हैं, उनके पाम्बर बहुत ही अच्छे थे। फल यह होता था कि उसी पोथीको लेकर मुसलमान लड़के हिन्दुओंको छेड़ते थे और हिन्दू लड़के कान ढलकाकर चुपके हो जाते थे । ___ वही बात अखबारोंमें भी है। जितने मुसलमानी समाचारपत्र हैं, चाहे वह पुराने ढर्रेके हों या नये ढक, चाहे वह धर्म सम्बन्धी हों या राजनीति सम्बन्धी, सब मुसलमान धर्मको प्रशंसा करते हैं, मुसल- मानोंकी तरफदारी करते हैं। अपने समाजका गौरव अक्षुन्न रखनेको चेष्टा करते हैं। एक टूटी ममजिद देवकर भी उनको जोश आता है । कहां अरब है, किस जगह वहां रेल बनती है, तथापि शिक्षित मुसल- मानोंका उधर ध्यान है। लाहोरके दो उद अखबारोंके सम्पादक वहां रेल जारी होनेके लिये हजारों रुपये हिन्दुस्थानसे एकत्र करके सुलतान- रूमके पास भेज रहे हैं। केवल यह जानकर कि उस सुदर मरुभूाममें मुसलमान धम्मके नेताने जन्म लिया था। किन्तु हिन्दुओंकी दूसरीही दशा है। अभी ऊपर "जमाना' पत्रको बात कही गई है। हिन्दुओंके साथ जैसा उमका बर्ताव है, हिन्दुओंके चलाये अन्यान्य उर्दू समाचार पत्रोंका भी वही बताव है। वह जब करते हिन्दुधर्मको कुछ निन्दाही करते हैं। उनके प्रबन्ध सदा संमार भरमें हिन्दुओंको हलका बनानेकी चेष्टामें निकलते हैं । हम क्या कहें, हमारे शिक्षित हिन्दू भाई स्वयं विचार कि वह अच्छा करते हैं या बुरा करते हैं। संसारमें कोई जाति भपने धर्म और अपनी जातिसे घृणा करके उन्नत हो मकती हैं तो वह लोग अच्छा ही करते हैं। अन्तिम प्रस्ताव "मखजन" से पहले उर्दूके कई एक और अच्छे मासिक पत्र जारी [ ३०४ 1