पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/३२८

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हिन्दी अखबार २ अखबारोंके विषयमें जो सबसे पहला लेब लिखा गया, उसमें दिखाया गया था कि भारतवपमें मन १८३५ ईस्वीमें समाचार पत्रोंको स्वाधीनता मिली। और उससे अगले वर्ष दिल्लीसे “उर्दू - अखबार"--निकला । उक्त पत्रमें राजनीति, समाजनीति आदिके लेग्व नहीं निकलते थे, जैसे कि आज कलके समाचारपत्रोंमें निकलते हैं। उर्दू के विद्वान और कवि लोगोंके वादानुवाद और कविता सम्बन्धी बात उसमें छपती थीं । इतने पर भी बड़े-बड़े अंगरेज हाकिम उसे अस्मी- अस्मी और अड़तालीम-अड़तालीम रूपये वार्षिक देकर खरीदते थे । इसके पीछे फुलम्कंप आकारके १६ पृष्ठ पर आगरेसे "मुफीदे खलायक" नामका एक अग्ववार निकला। वह कई वर्ष तक जारी रहा। उसमें खबर निकलती थीं। भारतके इतिहासके दो पृष्ठ उसमें निकलते थे । इसके सिवा उर्दू के कवियोंकी गजलं और दूसरी चीजें उसमें छपनी थीं। इससे यह अग्वबार भी ठीक अग्वबार कहनेके योग्य न था। ___ सन १८५० ईम्वीमें लाहोरसे “कोहेनूर" नामका एक साप्ताहिक उर्दू -पत्र निकला । वह उर्दू का असली पत्र कहलानेके योग्य हुआ। दस साल हुए काशीनिवासी बाबू श्रीराधाकृष्ण दासने हिन्दी अख- वारोंके विषयमें एक छोटीसी पुस्तक लिखी थी। उसमें उन्होंने दिखाया है कि हिन्दीमें सबसे पहले राजा शिवप्रसादकी सहायतासे सन् १८४५ ईस्वीमें “बनारस अखबार" निकला !* उक्त पत्र लीथोमें रद्दीसे कागजपर

  • सबसे पहला हिन्दी अखब र “उदन्न मार्तण्ड' मन् १.२६ २० में

कलकत्तसे प्रकाशित हुआ था। [ ३११ । --सम्पादक